#अपराध
January 6, 2026
हिमाचल: अब मेडिकल कॉलेज में रैगिंग से मचा हड़कंप, तीन प्रशिक्षु डॉक्टरों पर गिरी गाज
धर्मशाला छात्रा मामले के बाद मेडिकल कॉलेज में जूनियर से रैगिंग
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के कॉलेजों में रैगिंग की घटनाएं नासूर बनती जा रही है। धर्मशाला कॉलेज छात्रा की रैगिंग से जुड़ी संदिग्ध मौत की घटना की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। अब मंडी जिले के नेरचौक मेडिकल कॉलेज से चौंकाने वाला मामला सामने आ गया है। यहां सीनियर छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने जूनियर छात्र के कमरे में घुसकर उसके साथ मारपीट की। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने प्रदेश की मेडिकल, शिक्षा व्यवस्था, छात्र सुरक्षा और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंडी जिले के श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक के छात्रावास में अनुशासनहीनता की एक गंभीर घटना सामने आई है। आरोप है कि एमबीबीएस तृतीय वर्ष के सीनियर प्रशिक्षु डॉक्टरों ने द्वितीय वर्ष के एक जूनियर छात्र के साथ मारपीट की। यह घटना 18 दिसंबर की शाम की बताई जा रही है, जिसने पूरे कॉलेज परिसर में हड़कंप मचा दिया। हालांकि इस पूरे मामले की जांच के बाद आरोपी प्रशिक्षु डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की गई है।
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मिली जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज नेरचौक में सीनियर प्रशिक्षु डॉक्टरों की क्रूरता का शिकार हुआ द्वितीय वर्ष के एक जूनियर छात्र शिमला का रहने वाला बताया जा रहा है। पीड़ित छात्र ने घटना के अगले ही दिन इसकी जानकारी कॉलेज प्रशासन, हॉस्टल प्रबंधन और बल्ह थाना में लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज करवा दी थी। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के बाद अब आरोपी छात्रों पर बड़ी कार्रवाई की गई है।
मामले के सामने आते ही कॉलेज प्रबंधन ने तत्काल जांच कमेटी का गठन किया। आंतरिक जांच में यह पुष्टि हुई कि सीनियर प्रशिक्षु डॉक्टरों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए जूनियर छात्र के कमरे में घुसकर मारपीट की। हालांकि जांच के दौरान यह भी सामने आया कि घटना से पहले दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और तनाव की स्थिति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद सीनियर छात्रों द्वारा शारीरिक हिंसा को गंभीर अनुशासनहीनता माना गया।
एंटी.रैगिंग कमेटी की बैठक के बाद कॉलेज प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए तीन प्रशिक्षु डॉक्टरों को छात्रावास से निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और तीन महीने के लिए शैक्षणिक गतिविधियों से भी निलंबित कर दिया गया है।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीके वर्मा ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि संस्थान में किसी भी प्रकार की हिंसा, रैगिंग या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेडिकल कॉलेज का वातावरण सुरक्षित और अनुशासित बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई के साथ.साथ पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। बल्ह थाना में दर्ज शिकायत के आधार पर तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि घटना के पीछे रैगिंग का तत्व था या आपसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।