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January 6, 2026

हिमाचल HC के आदेश : पुलिस नशा तस्करों को हिंदी में बताए, आपको क्यों किया जा रहा अरेस्ट

हिन्दी न समझे तो आरोपी को उसकी भाषा में समझाएं

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Legal Rights

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एनडीपीएस मामलों में अहम आदेश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि नशा तस्करी के आरोप में किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने से पहले पुलिस को उसे उसकी गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट रूप से हिंदी भाषा में बताने होंगे। कोर्ट ने माना कि आरोपी को अपनी समझ की भाषा में जानकारी मिलना उसका संवैधानिक अधिकार है, ताकि वह प्रभावी रूप से अपना पक्ष रख सके।

खंडपीठ ने लिया फैसला

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने एक एनडीपीएस मामले से जुड़ी याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को यह बताया जाना चाहिए कि उसे किस स्थान पर और किस प्रकार की हिरासत में रखा जा रहा है।

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यह जानकारी एनडीपीएस एक्ट की धारा-3 के तहत जारी हिरासत आदेश के अनुपालन के लिए बेहद जरूरी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हिरासत के कारण उसी भाषा में बताए जाने चाहिए, जिसे आरोपित समझता हो, ताकि वह अपने पक्ष में प्रभावी ढंग से प्रतिनिधित्व कर सके।

हिन्दी न समझे तो आरोपी को उसकी भाषा में समझाएं

चूंकि, हिमाचल प्रदेश की आधिकारिक भाषा हिंदी है, इसलिए सामान्य तौर पर हिरासत आदेश और उससे संबंधित कारण हिंदी में दिए जाने चाहिए। यदि कोई व्यक्ति हिंदी नहीं समझता, तो उसे उसकी मातृभाषा या समझ की भाषा में भी कारणों की लिखित प्रति उपलब्ध करवाई जाए।

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इसके साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उसके कानूनी अधिकारों की जानकारी भी लिखित रूप में दी जाए। इसमें विशेष रूप से यह उल्लेख होना चाहिए कि उसे हिरासत आदेश के खिलाफ संबंधित अधिकारी के समक्ष प्रतिनिधित्व करने का अधिकार प्राप्त है। यह जानकारी हिंदी के साथ-साथ उस भाषा में भी दी जाए, जिसे वह व्यक्ति समझता हो।

अदालत ने इन्हें सौंपी जिम्मेदारी

इन सभी निर्देशों को सख्ती से लागू करवाने की जिम्मेदारी अदालत ने हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव (गृह) को सौंपी है, ताकि भविष्य में किसी भी आरोपी के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन न हो।

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