#अपराध
July 22, 2025
हिमाचल: सराज आपदा के 22 दिन बाद BSL जलाशय ने उगली सड़ी गली देह, कैसे होगी पहचान
बीएसएल जलाशय में मिली देह, पूरे शरीर पर बने हुए हैं टैटू
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद अब नदियां और जलाशय धीरे.धीरे अपने भीतर समाए हुए रहस्यों को बाहर उगलने लगे हैं। सुंदरनगर के बीएसएल जलाशय से मंगलवार को एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ है, जिसने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। आपदा के बाद बीते 22 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन अब भी कई लोग लापता हैं। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि यह शव भी उन्हीं में से किसी एक का हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने जलाशय में एक शव को तैरते हुए देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही सुंदरनगर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद शव को नागरिक अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखवा दिया गया है।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार शव की हालत देखकर यह स्पष्ट होता है कि यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि संभवतः बाढ़ के दिनों में ही किसी बहाव में बहकर आया शव हो सकता है, जो अब जाकर जलाशय में सतह पर दिखाई दिया है। शव के शरीर पर कई जगह टैटू बने हुए हैं, जो पहचान के लिए अहम सुराग साबित हो सकते हैं।
डीएसपी सुंदरनगर भारत भूषण ने बताया कि शव की जानकारी आसपास के सभी पुलिस थानों को भेज दी गई है, ताकि किसी गुमशुदा व्यक्ति की रिपोर्ट से इसकी पहचान की जा सके। उन्होंने आमजन से भी अपील की है कि यदि किसी को शव या उस पर बने टैटू के आधार पर कोई जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
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बता दें कि हिमाचल के सराज विधानसभा क्षेत्रों के थुनाग, करसोग सहित कई क्षेत्ों में 30 जून की रात को बादल फटने के बाद भयंकर तबाही हुई थी। उस रात आई प्राकृतिक आपदा ने कई परिवारों को उजाड़ कर रख दिया। सड़कों का नामोनिशान मिट गया, नदियां उफान पर आ गईं और कई लोग देखते ही देखते लापता हो गए। हालांकि प्रशासन और राहत दलों की ओर से लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन अभी तक सभी लापता लोगों का सुराग नहीं मिल पाया है। अब नदियों और जलाशयों से मिलने वाले शव लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या बाकी लापता लोग भी इसी तरह पानी के गर्त में समा गए होंगे।
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सरकार और प्रशासन के सामने अब एक बड़ी चुनौती यह भी है कि लापता लोगों की पहचान कैसे की जाए, विशेषकर तब जब शव कई दिनों तक पानी में रहने से क्षत.विक्षत हो चुके हों। ऐसे में डीएनए टेस्ट और अन्य वैज्ञानिक तरीकों की मदद ली जा रही है। साथ ही, आम जनता से भी सहयोग की अपील की जा रही है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद असली संघर्ष उनके गुजर जाने के बाद शुरू होता है। जब जिंदगी बचाने के साथ.साथ मृतकों की पहचान और अंतिम संस्कार जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं।