#अपराध
October 27, 2026
हिमाचल में करोड़ों का फर्जीवाड़ा: पूर्व MLA के बेटे समेत बिल्डर और अधिकारियों पर FIR से मचा हड़कंप
छह पुलियों के निर्माण से जुड़ा है पूरा मामला सरकार को लगाया करोड़ों के राजस्व का चूना
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बीबीएन/नालागढ़। हिमाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अचानक भारी हलचल मचा दी है। सत्ता और रसूख के गठजोड़ से जुड़े करोड़ों रुपये के एक बड़े फर्जीवाड़े के मामले में नालागढ़ के पूर्व विधायक के बेटे के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में केवल पूर्व विधायक का बेटा ही नहीं, बल्कि एक जानी-मानी बिल्डर कंपनी, राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) विभाग और खनन विभाग के तत्कालीन आला अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज की गई है। इस बड़ी कार्रवाई के सामने आते ही सियासी हलकों में हड़कंप मच गया है और विपक्षी खेमे से लेकर आम जनता तक में इस पर तीखी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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मामला नालागढ़ से बगलैहड़ के बीच नालागढ़-स्वारघाट मार्ग पर छह पुलियों के निर्माण से जुड़ा है। आरोप है कि निर्माण सामग्री की आपूर्ति को वैध दिखाने के लिए खनन विभाग की फर्जी वेबसाइट तैयार की गई और इसके माध्यम से करीब 2,500 कथित नकली एम-फॉर्म बनाए गए। शिकायत में सरकारी खजाने को रॉयल्टी के रूप में करोड़ों रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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इस मामले में रूहानी स्टोन क्रशर के मालिक अंचित ठाकुर, जो नालागढ़ के पूर्व विधायक के बेटे बताए गए हैं, के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही गणपति बिल्डर कंपनी और निर्माण कार्य के दौरान तैनात रहे राष्ट्रीय राजमार्ग व खनन विभाग के अधिकारियों को भी एफआईआर में शामिल किया गया है। किसी राजनीतिक रूप से जुड़े परिवार के सदस्य का नाम सामने आने के कारण इस मामले ने खास ध्यान खींचा है। हालांकि, एफआईआर में नाम दर्ज होना आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले में संबंधित पक्षों की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के आधार पर होगा।
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शिकायतकर्ता मोहन शर्मा के आरोपों के अनुसार, कथित अनियमितताएं नालागढ़-स्वारघाट मार्ग पर नालागढ़ से बगलैहड़ के बीच छह पुलियों के निर्माण के दौरान हुईं। निर्माण कार्य के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री की आपूर्ति को कागजों में वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर खनन विभाग की एक फर्जी वेबसाइट का सहारा लिया गया।
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शिकायत में दावा किया गया है कि इस वेबसाइट के जरिए करीब 2,500 नकली एम-फॉर्म तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल निर्माण सामग्री की सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों के रूप में किया गया। एम-फॉर्म खनिज सामग्री के परिवहन और उससे संबंधित रिकॉर्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल दस्तावेजों की कथित जालसाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी राजस्व और निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
इस मामले की शिकायत मोहन शर्मा ने सीधे राज्य सरकार से की थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद डीजीपी के निर्देश पर डीएसपी परवाणू ने प्रकरण की प्रारंभिक और विस्तृत जांच की। जांच रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने के लिए आधार मिलने के बाद नालागढ़ पुलिस थाना में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। इस कार्रवाई के बाद अब पुलिस की जांच का दायरा कथित फर्जी दस्तावेजों, निर्माण सामग्री की आपूर्ति और संबंधित अधिकारियों की भूमिका तक पहुंच सकता है।
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शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित फर्जी एम-फॉर्म के इस्तेमाल से सरकारी खजाने को रॉयल्टी के रूप में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि, नुकसान की वास्तविक राशि और कथित अनियमितताओं से जुड़े वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्योरा जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि कथित फर्जी वेबसाइट किसने बनाई, एम-फॉर्म किस प्रक्रिया से तैयार किए गए और उनका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में हुआ। इसके अलावा यह जांच भी महत्वपूर्ण होगी कि संबंधित विभागों के अधिकारियों की कोई भूमिका थी या नहीं।
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अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बद्दी संजीव भाटिया ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगामी जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित फर्जीवाड़े के तार अन्य लोगों या गतिविधियों से भी जुड़े हैं या नहीं।
बीबीएन हिमाचल प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, जहां बुनियादी ढांचे के निर्माण, खनन सामग्री की आपूर्ति और सरकारी राजस्व से जुड़े मामलों का सीधा संबंध प्रशासनिक निगरानी से है। ऐसे में पूर्व विधायक के बेटे, एक बिल्डर कंपनी और तत्कालीन विभागीय अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।