#अपराध
March 6, 2026
हिमाचल : वकील ने महर्षि पराशर पर की अभद्र टिप्पणी, देव समाज नाराज- पुलिस के पास पहुंचा मामला
वकील से धार्मिक आस्था को पहुंचाई ठेस
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मंडी। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में धार्मिक आस्था से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद जनभावनाएं भड़क उठी हैं। मंडी शहर के एक अधिवक्ता पर सोशल मीडिया के माध्यम से महर्षि पराशर को लेकर कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप लगे हैं। इस घटना के सामने आने के बाद देव समाज और श्रद्धालुओं में गहरा रोष देखने को मिल रहा है।
बताया जा रहा है कि यह मामला बीते माह 24 और 25 फरवरी के दौरान सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि उक्त अधिवक्ता ने अपनी पोस्ट में महर्षि पराशर के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। जैसे ही यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर सामने आई, स्थानीय लोगों और देव समाज से जुड़े लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
मामले को लेकर गुरुवार को पराशर ऋषि मंदिर कमेटी और देव संस्कृति संरक्षण संवर्धन समिति के प्रतिनिधियों ने DSP हेडक्वार्टर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एक लिखित शिकायत पत्र सौंपकर संबंधित अधिवक्ता के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई।
मीडिया से बातचीत के दौरान पराशर मंदिर कमेटी के प्रधान बलवीर ठाकुर ने कहा कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों में महर्षि पराशर को आपत्तिजनक शब्दों से संबोधित किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त अधिवक्ता ने अपनी टिप्पणी में राज माधव राय को छोड़कर अन्य देवी-देवताओं को भी तुच्छ श्रेणी में बताया है।
बलवीर ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है और यहां के लोगों की देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
इस मामले को लेकर क्षेत्र में देव समाज भी एकजुट होता नजर आया। जानकारी के अनुसार हाल ही में स्नोर, बदार, उत्तरशाल और सराज क्षेत्र की विभिन्न देव कमेटियों की एक अहम बैठक भी आयोजित की गई।
इस बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने एकमत से निर्णय लेते हुए राज्यपाल, प्रदेश सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों से मामले में निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की। देव कमेटियों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाती हैं बल्कि समाज में अनावश्यक विवाद भी पैदा करती हैं।
दूसरी ओर जब इस पूरे मामले को लेकर संबंधित अधिवक्ता से बातचीत की गई तो उन्होंने खुद को निर्दोष बताया। उनका कहना है कि उन्होंने महर्षि पराशर के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है।
अधिवक्ता के अनुसार उनकी पोस्ट का उद्देश्य किसी धार्मिक व्यक्तित्व का अपमान करना नहीं था, बल्कि वे एक पुजारी के विरोध में अपनी बात लिख रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उन्होंने पराशर ऋषि के बारे में कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की।
हालांकि, पराशर ऋषि मंदिर से जुड़े एक कारदार ने दावा किया है कि शुरुआत में अधिवक्ता द्वारा सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। उनका कहना है कि जब इस पोस्ट को लेकर विरोध बढ़ने लगा तो बाद में उसे संपादित कर दिया गया। कारदार के अनुसार मंदिर कमेटी से जुड़े कुछ युवाओं के पास उस पोस्ट के पुराने स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग मौजूद हैं, जिनमें कथित तौर पर मूल टिप्पणी देखी जा सकती है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद अब देव समाज और स्थानीय लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि वास्तव में धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की गई है तो दोषी के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल, पुलिस को शिकायत सौंप दी गई है और अब सबकी नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि देवभूमि में धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं का सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।