#अपराध
January 7, 2026
हिमाचल: युवक फर्जी दस्तावेज से विभाग में बन गया अधिकारी, विजिलेंस के पास पहुंचा मामला
माता-पिता कर रहे सरकारी नौकरी
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लाहौल-स्पीति। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए लोग कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। कई बार तो लोग सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेज तक बना डालते हैं। ऐसा ही एक मामला हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति जिला से सामने आया है। यहां एक युवक ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर सरकारी विभाग में बड़े अधिकारी का पद पर नौकरी हासिल कर ली। मामले का खुलासा होने पर अब आरोपी युवक विजिलेंस के शिकंजे में फंस गया है।
आरोप है कि लाहौल स्पीति में एक युवक ने फर्जी दस्तावेज के सहारे जल शक्ति विभाग में कनिष्ट अभियंता (JE) का पद हासिल कर लिया। युवक ने इस नौकरी को पाने के लिए फर्जी आईआरडीपी का दस्तावेज बनाया था। अब मामले का खुलासा होने के बाद आरोपी के खिलाफ पुलिस थाना में शिकायत दर्ज करवाई गई है। वहीं विजिलेंस भी मामले की जांच में जुट गई है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी अधिकारी फिलहाल लाहुल‑स्पीति जिले के केलंग में अपनी ड्यूटी कर रहा हैं। इस मामले को लेकर कंधोल निवासी महेंद्र गुप्ता ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अधिकारी ने नौकरी पाने के लिए फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया। महेंद्र गुप्ता ने इस संदर्भ में विजिलेंस मंडी, प्रदेश के मुख्य सचिव और जलशक्ति विभाग के मुख्य अभियंता को लिखित शिकायत सौंपी है।
आरोप है कि आरोपी अधिकारी के माता-पिता दोनों ही सरकारी सेवा में रहे हैं। उनकी माता शिक्षा विभाग में और पिता स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे। ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति वास्तव में IRDP (गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी में आती है या नहीं, इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि स्थिर सरकारी नौकरी और नियमित आय वाले इस परिवार के लिए फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल करना समझ से परे है।
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शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपी अधिकारी पहले भी जलशक्ति विभाग से जुड़े रहे हैं। वह 1992 से 2000 तक विभाग में दैनिक भोगी सर्वेयर के रूप में कार्यरत रहे। इस दौरान उन्होंने सुंदरनगर और करसोग मंडलों में अपनी सेवाएं दीं। विभाग में लंबे समय तक काम करने के अनुभव के चलते उन्हें स्थानीय क्षेत्र और विभागीय कार्यों की अच्छी जानकारी थी।
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ऐसे में आरोप है कि अनुभवी होने के बावजूद उन्होंने फर्जी दस्तावेज का सहारा लेकर नई नौकरी प्राप्त करने की कोशिश की, जो मामले की गंभीरता को और बढ़ा देता है। इसके बावजूद, पिछले साल अजय गुप्ता का चयन IRDP कोटे के तहत कनिष्ठ अभियंता (JE) पद पर कर दिया गया, जो नियमों और प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
अजय गुप्ता, गोहर उपमंडल , जिला मंडी के रुप में हुई है।
मामले की शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने जांच शुरू कर दी है। जांच में अजय गुप्ता के IRDP प्रमाणपत्र की वैधता, परिवार की आय से जुड़े दस्तावेज, सेवा रिकॉर्ड और चयन प्रक्रिया के सभी पहलुओं को बारीकी से देखा जा रहा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो विभागीय और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।