#अपराध

April 3, 2026

गजब..पंजाब से 12 साल पहले चोरी हुई स्कूटी हिमाचल में मिली, दो राज्यों के निगरानी तंत्र पर उठे सवाल

आरोपी सिस्टम की आंखों में धूल झोंक 12 साल सड़कों पर दौड़ाते रहे चोरी की स्कूटी

शेयर करें:

Una Scooty recover

ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला से एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने दो राज्यों की आधुनिक पुलिसिंग और हाई-टेक निगरानी व्यवस्था के दावों की कलई खोलकर रख दी है। ऊना जिला में पुलिस ने एक ऐसी स्कूटी बरामद की है, जो करीब 12 साल पहले पंजाब से चोरी हुई थी और इतने लंबे समय तक इस चोरी की स्कूटी को बिना किसी डर के सड़कों पर दौड़ाया गया।

पुलिस को देख स्कूटी छोड़ भागे दो युवक

जानकारी के अनुसार यह मामला ऊना जिले के गगरेट क्षेत्र का है। गगरेट पुलिस ने आशादेवी क्षेत्र में पंजाब-हिमाचल सीमा पर एक नियमित सुरक्षा नाका लगाया हुआ था। इसी दौरान एक स्कूटी पर सवार दो युवक वहां पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी देख युवकों के हाथ-पांव फूल गए। पकड़े जाने के डर से वे स्कूटी को मौके पर ही छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। संदेह होने पर जब पुलिस ने वाहन की पड़ताल की तो एक के बाद एक चौंकाने वाली परतें खुलती चली गईं।

यह भी पढ़ें : JBT ट्रांसफर केस में हाईकोर्ट सख्त- मनचाहा जिला नहीं मिलेगा, सरकार को दिए बड़े सुझाव

12 साल पहले चोरी हुई थी स्कूटी

प्रारंभिक जांच में स्कूटी पर लगा नंबर फर्जी पाया गया। इसके बाद पुलिस ने चेसिस नंबर के आधार पर असली रिकॉर्ड खंगालाए तो मामला 12 साल पुरानी चोरी से जुड़ा निकला। रिकॉर्ड के मुताबिक यह स्कूटी पंजाब के जालंधर निवासी एक व्यक्ति के नाम पर दर्ज थी और वर्षों पहले चोरी हो गई थी। यह बरामदगी जहां गगरेट पुलिस की मुस्तैदी का प्रमाण है, वहीं दो राज्यों में हाईटेक नंबर प्लेट, डिजीटल निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है।

यह भी पढ़ें : टोल टैक्स हंगामे के बाद बैकफुट पर सुक्खू सरकार- HP नंबर को बड़ी राहत, बाहरी के भी घटाए रेट

दो राज्यों में बेखौफ दौड़ती रही स्कूटी

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह स्कूटी पिछले एक दशक से भी अधिक समय तक हिमाचल और पंजाब की सड़कों पर बेखौफ दौड़ती रही, लेकिन न तो किसी सीसीटीवी कैमरे की नजर में आई और न ही किसी टोल प्लाजा या पुलिस चेकिंग के दौरान पकड़ी गई। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब हर जगह डिजिटल निगरानी, नंबर प्लेट पहचान प्रणाली और सुरक्षा के दावे किए जाते हैं, तो फिर यह वाहन इतने वर्षों तक सिस्टम से बाहर कैसे रहा।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में 1500 करोड़ का जमीन घोटाला! मुख्य सचिव पर कई आरोप- 10 दिन बाद भी नहीं हुई FIR

पुलिस की निगरानी तंत्र पर उठे सवाल

यह मामला न केवल दो राज्यों की पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता हैए बल्कि निगरानी तंत्र की वास्तविक प्रभावशीलता को भी कटघरे में खड़ा करता है। यदि एक साधारण चेसिस नंबर के जरिए वाहन की असली पहचान की जा सकती थी, तो इतने लंबे समय तक यह प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?

12 साल बाद स्कूटी मिलने से मालिक भी हैरान

पुलिस ने बरामद स्कूटी को कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्जे में लेकर वास्तविक मालिक से संपर्क किया। वर्षों बाद अपनी खोई हुई स्कूटी का सुराग मिलने पर मालिक भी हैरान रह गया। अदालत की औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद वाहन को उसके असली मालिक को सौंप दिया गया। 

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में गहराया LPG सिलेंडर संकट : रेट ने तोड़ी कमर, बंद होने की कगार पर ढाबे-होटल

 

हालांकि, स्कूटी की बरामदगी पुलिस की सतर्कता का उदाहरण जरूर है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की हाईटेक तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था के तमाम दावों की हवा निकाल दी है। फिलहाल, स्कूटी अपने असली मालिक तक पहुंच चुकी है, लेकिन इसे वर्षों तक इस्तेमाल करने वाले लोग अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और चिंताजनक पहलू बना हुआ है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख