#अपराध
February 17, 2026
हिमाचल: फॉरेस्ट गार्ड ने पांच हजार में बेच दिया इमान, विजिलेंस ने रिश्वत लेते धरा
पेड़ कटाने से जुड़े मामले का रफा दफा करने की एवज में मांगी रिश्वत
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नालागढ़ (सोलन)। हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार इस कद्र फैल गया है कि मौका मिलने पर कई अधिकारी या कर्मचारी चंद पैसों के लिए अपने इमान को बेच देते हैं। ऐसा ही एक मामला हिमाचल के सोलन जिला नालागढ़ से सामने आया है। यहां विजिलेंस विभाग की टीम ने वन विभाग के एक ऐसे कर्मचारी को दबोचा है, जिसने अपना ईमान महज पांच हजार रुपये में बेच दिया। बद्दी के औद्योगिक क्षेत्र में तैनात वन विभाग के एक वन रक्षक को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि वह पेड़ कटान से जुड़े मामले को रफा.दफा करने के बदले पैसे मांग रहा था।
बद्दी में विजिलेंस थाना की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग के एक फॉरेस्ट गार्ड को 5000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोपी नालागढ़ वन परिक्षेत्र के दभोटा बीट में तैनात था। बताया जा रहा है कि आरोपी वन रक्षक ने एक व्यक्ति से पेड़ कटान के मामले में कार्रवाई न करने और केस को दबाने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने इस अवैध मांग को मानने से इनकार कर दिया और सीधे विजिलेंस से संपर्क किया।
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शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने तुरंत रणनीति बनाई। डीएसपी विजिलेंस डॉ प्रतिभा चौहान के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाया। तय योजना के तहत जैसे ही आरोपी ने शिकायतकर्ता से पांच हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, टीम ने मौके पर दबिश देकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के कब्जे से रिश्वत की राशि बरामद कर ली गई। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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विजिलेंस अधिकारी अब आरोपी से गहन पूछताछ कर रहे हैं। जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि क्या वह पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है। आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड लेने की तैयारी की जा रही है, ताकि पूरे मामले की तह तक पहुंचा जा सके।
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यह पहली बार नहीं है जब वन विभाग के कर्मचारी पर रिश्वतखोरी का आरोप लगा हो। कुछ समय पहले भी इसी क्षेत्र में एक अन्य फॉरेस्ट गार्ड को बड़ी रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। लगातार सामने आ रहे मामलों ने विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पांच हजार रुपये के लिए कर्मचारी अपना ईमान बेच सकते हैं, तो आम नागरिकों को न्याय कैसे मिलेगा। फिलहाल विजिलेंस की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार पर सख्ती बरती जाएगीए चाहे आरोपी किसी भी विभाग का क्यों न हो।