#अपराध
September 29, 2025
हिमाचल में छुआछूत ने ली 12 वर्षीय किशोर की जा*न, महिला ने पिटाई के बाद गोशाला में किया था बंद
महिला ने 12 वर्षीय बच्चे से छुआछुत के चलते किया अमानवीय व्यवहार
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक बेहद ही इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां छुआछूत और सामाजिक भेदभाव की वजह से एक 12 वर्षीय बच्चे ने जहर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। आज जब देश दुनिया विज्ञान, तकनीक और आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, उस दौर में हिमाचल प्रदेश में छुआछूत इंसानियत पर एक गहरा धब्बा है। घटना शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के चिड़गांव क्षेत्र की है।
बताया जा रहा है कि यह मामला हालांकि 17 सितंबर का है, लेकिन इस मामले में पुलिस ने 20 सितंबर को केस दर्ज किया था। दरअसल 16 सितंबर को चिड़गांव के एक 12 वर्षीय बच्चे की जहर खाने से मौत हो गई थी। पहले तो परिजनों को समझ ही नहीं आया कि आखिर उनके बेटे ने जहर क्यों खाया। लेकिन बाद में बच्चे की मां को पता चला कि गांव की ही तीन महिलाओं ने उनके बेटे को पीटा था और उसे गोशाला में बंद कर दिया था।
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परिजनों को पता चला कि 16 सितंबर की शाम उनका बच्चा खेलते-खेलते गांव की एक महिला के घर चला गया था। आरोप है कि महिला ने बच्चे छुआछुत के चलते ना सिर्फ बच्चे के साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि उसकी पिटाई कर उसे गोशाला में बंद कर दिया। किसी तरह भागकर घर पहुंचा बच्चा इस अपमान और प्रताड़ना से इतना आहत हुआ कि उसने घर आकर जहर निगल लिया।
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शाम को पिता ने बच्चे को अचेत अवस्था में पाया। तुरंत उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रोहड़ू ले जाया गया] जहां से गंभीर हालत के कारण आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद 17 सितंबर की रात करीब डेढ़ बजे उसकी मौत हो गई।
शुरुआत में परिजन बच्चे के आत्मघाती कदम से अनजान थे। लेकिन 18 सितंबर को मृतक की मां ने बताया कि गांव की तीन महिलाओं ने उसके बेटे को पीटा और गोशाला में बंद कर दिया था। उसी अपमान और छुआछूत की यातना ने बेटे को जहर खाने पर मजबूर कर दिया। बच्चे की मां का आरोप है कि उसके बेटे को महिला ने पीटा और फिर गोशाला में बंद कर दिया, क्योंकि वह अनुसूचित जाति से संबंध रखता था और खेलते.खेलते दूसरी जाति के परिवार के घर चला गया था।
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पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 107, 127(2), 115(2), 3(5) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं मामले की पुष्टि करते हुए रोहड़ू के डीएसपी प्रणव चौहान ने बताया कि परिजनों के बयान पर पुलिस ने केस दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी है। किशोर की मां के बयान भी दर्ज किए गए हैं। एससीए एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले में अभी एक ही महिला का नाम सामने आया है।
यह घटना केवल एक परिवार का दुःख नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गहरा सवाल है। जिस दौर में दुनिया चांद और मंगल तक पहुंच चुकी है, वहीं हमारे बीच कुछ लोग अब भी छुआछूत जैसे पुराने और अमानवीय विचारों को थामे हुए हैं। सवाल यह है कि क्या हम सचमुच एक आधुनिक और संवेदनशील समाज की ओर बढ़ रहे हैं या अब भी कुरीतियों के अंधकार में जी रहे हैं?