#अपराध
September 23, 2025
हिमाचल: महिला को देख फिसली शख्स की नीयत, फर्नीचर शोरूम में कर डाली नीच हकरत
नीचता करने वाले आरोपी की जमानत याचिका खारिज
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, आजकल महिलाओं के प्रति बढ़ती शोषण की घटनाओं के कारण चिंता का विषय बनता जा रहा है। हाल ही में जिला कुल्लू और मंडी के सुंदरनगर में सामने आई दो गंभीर घटनाओं ने राज्य में महिला सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुल्लू जिले के भुंतर कस्बे में स्थित एक फर्नीचर शोरूम में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि एक बुजुर्ग ग्राहक ने उसके साथ अश्लील हरकतें कीं। यह घटना 20 सितंबर को घटित हुई, जिसके बाद पीड़िता ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उक्त व्यक्ति की हरकतों से वह मानसिक रूप से इतनी आहत हुई कि आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने का विचार तक उसके मन में आया।
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इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब यह शिकायत राज्य महिला आयोग तक पहुंची। आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी ने इस पर संज्ञान लेते हुए कुल्लू के पुलिस अधीक्षक डॉ कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन से फोन पर बात की और मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। एसपी ने आश्वस्त किया है कि कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और पीड़िता को हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।
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एक अन्य गंभीर मामला मंडी जिले के सुंदरनगर से सामने आया है, जहां एक युवती के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दी है। आरोपी ने कोर्ट में यह दलील दी थी कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं। हालांकि लोक अभियोजन ने इस तर्क का खंडन करते हुए बताया कि आरोपी ने युवती को जबरदस्ती अपने वाहन में बैठाकर गांव ले गया, जहां उसके साथ मारपीट और दुष्कर्म किया गया। इतना ही नहीं पीड़िता का मोबाइल फोन भी तोड़ दिया गया ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके।
मेडिकल और फोरेंसिक जांच में इन आरोपों की पुष्टि हुई है। न्यायालय ने यह कहते हुए याचिका खारिज की कि दुष्कर्म केवल एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि समाज की मूलभूत संरचना पर प्रहार है। आरोपी की रिहाई से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और गवाहों पर दबाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इन दोनों मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हिमाचल प्रदेश जो अब तक शांतिपूर्ण और सुरक्षित राज्य के रूप में जाना जाता था, वहां भी महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हो रही है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह संकेत देती है कि अब समय आ गया है कि समाज, प्रशासन और कानून व्यवस्था को और अधिक संवेदनशील और सक्रिय बनना होगा।