#अपराध
September 25, 2025
हिमाचल: पिता के इलाज को IGMC आई लड़की से डॉक्टर ने किया मुंह काला, 9 महीने नो*ची
हाईकोर्ट ने डॉक्टर की जमानत याचिका की खारिज
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां भगवान का रूप कहे जाने वाला एक डॉक्टर 17 साल की लड़की को 9 महीने तक नोचता रहा। यह लड़की अपने पिता का इलाज करवाने के लिए अस्पताल आई थी। जहां पर डॉक्टर ने उसे बहला फुसला कर अपने जाल में फांस लिया और फिर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। जब यह मामला पुलिस थाना पहुंचा तो आरोपी ने कोर्ट से जमानत याचिका लगा दी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण के आरोप झेल रहे डॉक्टर विनय जिष्टु की अग्रिम जमानत याचिका को गंभीरता से सुनते हुए खारिज कर दिया है। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने आदेश देते हुए कहा कि डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास और संवेदनशीलता का रिश्ता होता है। ऐसे में यदि कोई चिकित्सक उस भरोसे को तोड़ता है तो यह समाज और पेशेवर नैतिकता के लिए गंभीर खतरा है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि आरोपों के मुताबिक आरोपी ने पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाकर डॉक्टर.मरीज के पवित्र रिश्ते का उल्लंघन किया है। इस तरह के मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
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मामला 4 सितंबर 2025 को शिमला महिला थाना में दर्ज किया गया था। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत एफआईआर दर्ज की है। यह धाराएं नाबालिग के साथ यौन शोषण और गंभीर अपराधों से संबंधित हैं।
पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह अपने बीमार पिता के इलाज के लिए पिछले 9-10 महीनों से इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल] शिमला आ रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात आरोपी डॉक्टर से हुई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि 29 अक्टूबर 2024 को ओपीडी में मुलाकात के बाद डॉक्टर ने उससे करीबी बढ़ानी शुरू की और 11 दिसंबर 2024 से 26 अगस्त 2025 तक विभिन्न स्थानों पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
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पुलिस ने जांच में पीड़िता का मोबाइल फोन, होटल की एंट्री रजिस्टर और डॉक्टर का आधार कार्ड बरामद किया। साथ ही पीड़िता ने उन स्थानों की भी पहचान की जहां उसके साथ दुष्कर्म हुआ था।
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इस घटना ने हिमाचल प्रदेश में नाबालिगों और महिलाओं के साथ बढ़ती यौन शोषण की घटनाओं को लेकर समाज में चिंता बढ़ा दी है। हाल के वर्षों में पुलिस और न्यायालयों के पास ऐसे मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अपराधों के पीछे बढ़ती संवेदनहीनता और कानून के डर में कमी भी एक वजह है।