#अपराध
February 11, 2026
हिमाचल में जज के साथ भी ठगी हो गई, पैसे डबल करने के चक्कर में 6 लाख का लगा चूना
निवेश का झांसा देकर लगाई लाखों की चपत
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ठग अब इतने चालाक और संगठित हो चुके हैं कि पढ़े-लिखे और समझदार लोग भी उनके झांसे में आ रहे हैं। ताजा मामला हमीरपुर जिले से सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। इस बार ठगों ने किसी आम व्यक्ति को नहीं, बल्कि एक जज को अपना शिकार बनाया। इस घटना ने साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी किस तरह भरोसा जीतकर बड़ी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जज को दिसंबर 2025 में एक महिला का फोन आया। उसने खुद को बैंक कर्मचारी बताया और म्यूचुअल फंड व मनी बैक स्कीम में निवेश करने का ऑफर दिया। महिला ने भरोसा दिलाया कि कम समय में मोटा मुनाफा मिलेगा और रकम सुरक्षित रहेगी। शुरुआत में बातचीत सामान्य रही, जिससे जज को किसी तरह का शक नहीं हुआ।
कुछ दिनों बाद महिला ने कहा कि उनका बैंक खाता एक्टिव नहीं है और उसे सक्रिय करने के लिए 2,360 रुपये जमा करवाने होंगे। जज ने बताए गए खाते में यह रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद उन्हें कई व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां रोजाना बड़े रिटर्न और सफल निवेश की बातें साझा की जाती थीं। इससे भरोसा और बढ़ता गया।
फिर एक अन्य महिला ने संपर्क किया और एप्पल एप स्टोर से एक खास ऐप डाउनलोड करवाया। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी करवाई गई। ऐप में निवेश बढ़ता हुआ दिखाया जाता था, जिससे यह भरोसा हो गया कि पैसा सही जगह लगाया गया है। अलग-अलग किस्तों में उनसे कुल करीब 6 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।
कुछ समय बाद जब जज ने निवेश की रकम निकालने की बात कही तो पहले बहाने बनाए गए। कभी कहा गया कि प्रोसेस चल रही है, तो कभी टैक्स और चार्ज के नाम पर और पैसे मांगे गए। जब उन्होंने साफ मना कर दिया तो संपर्क करना कम कर दिया गया। आखिरकार उन्हें एहसास हुआ कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं।
SP हमीरपुर बलबीर सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर सदर थाना में IPC की धारा 318 (4) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उनका बैंक खाता शिमला में है। जांच जारी है। पुलिस साइबर टीम की मदद से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
इधर कांगड़ा जिले में भी एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को डरा दिया है। यहां साइबर ठगों ने एक डॉक्टर को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर 36 लाख रुपये ठग लिए। इन दोनों मामलों ने साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। कहीं निवेश का लालच दिया जा रहा है, तो कहीं कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर रकम ट्रांसफर करवाई जा रही है।
पुलिस की आम जनता से अपील की है कि-