#अपराध

April 25, 2025

हिमाचल: पंचायत प्रधान ने सरकारी कर्मी बना दिया मनरेगा मजदूर, रिश्तेदार बनाया वेंडर; हुआ बर्खास्त

कारण बताओ नोटिस का दिया गोलमोल जवाब 

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Panchayat Pradhan Suspended

चंबा। हिमाचल प्रदेश में चंबा जिले के भटियात की बलेरा पंचायत के प्रधान को करप्शन केस में सस्पेंड कर दिया गया है। ग्राम प्रधान ने मनरेगा की सामग्री सप्लाई के लिए अपने एक रिश्तेदार को वेंडर बना दिया। इससे भी आगे बढ़कर उसने एक सरकारी मुलाजिम को मनरेगा मस्टर रोल में दिहाड़ी दे दी। कर्मचारी डलहौजी में पोस्टेड है।

जांच में सही निकले आरोप

इस मामले में स्थानीय निवासी पंकज पलभर की शिकायत के बाद सरकार ने जांच बिठाई तो सारे आरोप सही साबित हुए। इसके बाद ग्राम प्रधान को कारण बताओ नोटिस दिया गया, जिस पर उसने गोलमोल जवाब दिया। आखिर में बलेरा पंचायत के ग्राम प्रधान को सस्पेंड किया गया है। प्रशासन ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

 

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सरकारी नियमों की धज्जियां

ग्राम प्रधान के खिलाफ शिकायत करने वाले पंकज पलभर को प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए अनशन पर बैठना पड़ा था। शुक्रवार को प्रधान के सस्पेंशन की खबर मिलने के बाद उन्होंने अनशन तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि नियमानुसार, ग्राम प्रधान अपने रिश्तेदार को वेंडर नहीं बना सकते हैं और न ही किसी सरकारी कर्मी को मनरेगा का दिहाड़ी मजदूर बना सकते हैं। साफ तौर पर यह सारा खेल भ्रष्टाचार का है। उन्होंने ग्राम प्रधान के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार और प्रशासन का धन्यवाद जताया है।

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इसीलिए छीना अधिकार

हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में मनरेगा के काम में भ्रष्टाचार की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने पंचायतों से मनरेगी की सामग्री आपूर्ति का टेंडर जारी करने का अधिकार छीनकर बीडीओ को सौंप दिया है। नवंबर 2023 में पंचायती राज विभाग द्वारा कराए गए एक ऑडिट में 13 विकास खंडों में ₹12.5 करोड़ की वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुईं। लगभग 150 पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों पर राशि की वसूली के लिए नोटिस जारी किए गए, जिनमें पंचायत प्रधान, पूर्व प्रधान, सचिव और तकनीकी अधिकारी शामिल हैं।

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करप्शन की 1353 शिकायतें

2018 से 2025 के बीच पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ 1,353 भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 611 का निपटारा हो चुका है, जबकि 237 मामलों की जांच जारी है। सितंबर 2023 तक राज्य सरकार ने 276 अधिकारियों और कर्मचारियों को "संदिग्ध ईमानदारी" की सूची में रखा है, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले लंबित हैं।

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