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April 12, 2025

हिमाचल: बौद्ध मठ से अचानक लापता हुए 2 भिक्षु बालक, मोबाइल वहीं छूटा

चौतरफा पुलिस की तलाशी से फैली सनसनी

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शिमला (वैभव त्रिपाठी)। हिमाचल प्रदेश में शिमला के संजौली इलाके में बने 63 साल पुराने जोनांग बौद्ध मठ से अचानक दो भिक्षु बालक अचानक गायब हो गए हैं। उनकी इस गुमशुदगी के बाद शिमला पुलिस ने बच्चों की तलाशी के लिए चौतरफा अभियान चलाया है। इससे राजधानी में सनसनी फैल गई है।

दोपहर की घटना

मठ प्रबंधन ने शुक्रवार को ढली थाने में बौद्ध मठ से बाल भिक्षुओं के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। इनमें से एक अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर जिले का है, जबकि दूसरा पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग क्षेत्र का है।

 

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दोनों भिक्षुओं की उम्र 16 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है, जो मठ में नियमित प्रशिक्षण ले रहे थे। मठ प्रबंधक पेमा फुंटसोक ने बताया कि शुक्रवार को दोनों बच्चे सामान्य तरीके से प्रार्थना और रोजाने की दिनचर्या में शामिल हुए थे। उनके स्वभाव में किसी तरह का बदलाव नहीं देखा गया। लेकिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच दोनों बच्चे गायब मिले। मठ प्रबंधन ने उन्हें काफी खोजा और आखिर में पुलिस को गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

अपना सामान भी ले गए

अब पुलिस मठ के सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है। साथ ही मठ के अन्य बौद्ध भिक्षुओं और स्टाफ से भी पूछताछ हो रही है। बाल भिक्षुओं की तलाश में आसपास के इलाकों में सर्च अभियान शुरू किया गया है।

 

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प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि वे अपने साथ कुछ निजी सामान भी ले गए हैं, लेकिन उनका मोबाइल फोन मठ में ही छूटा हुआ मिला, जिससे उनकी लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो रहा है।

1963 में हुई थी बौद्ध मठ की स्थापना

यह मठ जोनांग परंपरा का अनुसरण करता है, जो तिब्बती बौद्ध धर्म की चार प्रमुख शाखाओं में से एक है। जोनांग परंपरा विशेष रूप से अपनी "शेंटोंग" (खालीपन की दूसरों से भिन्न व्याख्या) दार्शनिक विचारधारा और कालचक्र तंत्र के अभ्यास के लिए जानी जाती है। जोनांग परंपरा की उत्पत्ति 12वीं शताब्दी में तिब्बत में हुई थी।

 

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इसके संस्थापक युमो मिक्यो दोर्जे थे। हालांकि, 17वीं शताब्दी में जोनांग परंपरा को तिब्बत में कुछ समय के लिए दबा दिया गया था, लेकिन यह बाद में पुनर्जनन के साथ फिर से उभरी।

भारत का इकलौता मठ

संजौली का जोनांग मठ भारत में इस तिब्बती बौद्ध परंपरा का एकमात्र मठ है। इसकी स्थापना वर्ष 1963 में अमदो लामा जिनपा ने की थी। इसे पहले 'सांगे चोलिंग' के नाम से जाना जाता था। मठ में फिलहल 100 से अधिक भिक्षु रहते हैं।

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