#अपराध
March 17, 2026
हिमाचल: नौकरी का झांसा देकर गरीब लड़कियों से करवाया दे.ह व्यापार, जानें हाईकोर्ट ने क्या कहा...
हिमाचल हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका की खारिज
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मनाली। हिमाचल प्रदेश की पर्यटन नगरी मनाली में बाहरी राज्यों की गरीब लड़कियों से जबरन जिस्मफरोशी का धंधा करवाया जा रहा था। इन लड़कियों को नौकरी का झांसा देकर यहां लाया जाता था और फिर डरा धमका कर उनसे वेश्यावृत्ति करवाई जाती थी। इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने आरोपियों को लेकर सख्त टिप्पणी भी की है।
हिमाचल हाईकोर्ट में आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि पैसों के लिए किसी को वेश्यावृत्ति में धकेलना इंसानियत का सबसे बड़ा पतन है। उन्होंने कहा कि इस तरह के अपराध इंसानी शरीर को वस्तु बनाकर पेश करते हैं और मानव तस्करी समाज के लिए बड़ा खतरा है, जिसे किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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इस मामले की जांच में कई हैरान कर देने वाले तथ्य सामने आए, जिन्होंने लोगों को झकझोर कर रख दिया। जांच में सामने आया कि आरोपी गिरोह गरीब और जरूरतमंद लड़कियों को निशाना बनाते थे। वह बाहरी राज्यों खासकर पंजाब की गरीब लड़कियों को मनाली में अच्छी नौकरी का लालच देते थे। लेकिन जब यह लड़कियां मनाली में पहुंचती थी, तो उन्हें डरा धमका कर देह व्यापार के धंधे में धकेल दिया जाता था। अदालत ने साफ कहा कि आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाना और किसी को इस तरह के काम के लिए मजबूर करना गंभीर अपराध है।
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यह मामला 22 दिसंबर 2025 को सामने आया था, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि मनाली में संगठित तरीके से सेक्स रैकेट चल रहा है। इसके बाद पुलिस ने मॉल रोड और बस स्टैंड इलाके में जाल बिछाया। नकली ग्राहकों को चिह्नित नोट देकर आरोपियों के संपर्क में भेजा गया। जैसे ही सौदा तय हुआ, पुलिस ने दबिश देकर संदीप कौर, संतोष, कविता खातून समेत अन्य को रंगे हाथों पकड़ लिया। तलाशी में उनके पास से वही चिह्नित नोट भी बरामद हुए।
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सरकार की ओर से अदालत में पेश दलीलों में बताया गया कि यह कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का काम है। आरोपी लंबे समय से इस अवैध धंधे में शामिल थे और इसी से अपनी कमाई कर रहे थे। अदालत ने सभी तथ्यों और सबूतों को गंभीरता से लेते हुए साफ किया कि ऐसे अपराधों में किसी तरह की रियायत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में नरमी बरतना समाज के लिए खतरनाक होगा। इसी आधार पर सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। हाईकोर्ट के इस फैसले को मानव तस्करी और जबरन देह व्यापार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है, जिससे ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है।