#राजनीति
March 17, 2026
हिमाचल में 'मित्रों' की मौज खत्म: CM सुक्खू ने सभी से छीना कैबिनेट दर्जा, सैलरी में भी कटौती
भारी कर्ज और आर्थिक तंगी के बीच बड़ा फैसला
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य के गहरे आर्थिक संकट और वित्तीय अनुशासन को देखते हुए एक बहुत बड़ा और कड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने विभिन्न बोर्डों, निगमों और आयोगों में तैनात अपने 'खास' पदाधिकारियों को दिए गए कैबिनेट रैंक को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। इस फैसले को मुख्यमंत्री के करीबियों और राजनीतिक नियुक्तियों पर एक बड़े 'प्रहार' के तौर पर देखा जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश इस समय भारी कर्ज और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली 'रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट' में कटौती और राज्य के खाली होते खजाने को देखते हुए सुक्खू सरकार ने फिजूलखर्ची रोकने के लिए ये कदम उठाया है।
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सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब बोर्ड और निगमों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, डिप्टी चेयरमैन, प्रधान सलाहकार और राजनीतिक सलाहकारों को मिलने वाला कैबिनेट स्तर का दर्जा और उससे जुड़ी सुविधाएं खत्म कर दी गई हैं।
सरकार ने केवल दर्जा ही नहीं छीना बल्कि इन सभी पदाधिकारियों की जेब पर भी सीधा असर डाला है। आदेश में साफ कहा गया है कि इन सभी चेयरमैन और सलाहकारों के वेतन या मानदेय में 20 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। ये कटौती 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी। इसका मतलब है कि अगले 6 महीनों तक इन नेताओं को कम वेतन से संतोष करना होगा।
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इस फैसले की जद में कांग्रेस के कई कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री के करीबी सलाहकार आए हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
इनके अलावा अन्य बोर्डों और निगमों में तैनात दर्जनों राजनीतिक नियुक्तियों से अब 'कैबिनेट मंत्री' वाली सुविधाएं (जैसे विशेष गाड़ी, स्टाफ और अन्य भत्ते) छिन जाएंगी।
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विपक्ष के निशाने पर सरकार: BJP लगातार सुक्खू सरकार पर 'मित्रों की सरकार' होने और खजाना खाली होने के बावजूद राजनीतिक नियुक्तियां करने का आरोप लगा रही थी। इस फैसले से सरकार ने विपक्ष के एक बड़े मुद्दे को शांत करने की कोशिश की है।
मुख्य सचिव की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि इस आदेश को तुरंत लागू किया जाए। हिमाचल की राजनीति में इस फैसले को 'कड़वी दवा' माना जा रहा है। अब देखना ये होगा कि कैबिनेट रैंक छिनने के बाद सरकार के भीतर इन नेताओं की नाराजगी सामने आती है या वे आर्थिक संकट में सरकार के साथ खड़े नजर आते हैं।