#अपराध
February 11, 2026
हिमाचल: इंस्टाग्राम पर हुई दोस्ती, शादी तक पहुंची... मंडप में फेरों से पहले पुलिस की एंट्री ने तोड़े सपने
इंस्टाग्राम वाले इश्क पर कानून ने बैठा दिया पहरा, नहीं हो सकी शादी
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ऊना। आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए दोस्ती होना अब आम बात हो गई है। कई बार यही ऑनलाइन दोस्ती प्यार में बदल जाती है और रिश्ते शादी तक पहुंच जाते हैं। ऐसा ही एक मामला हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला से सामने आया, जहां सोशल मीडिया इंस्टाग्राम पर शुरू हुई एक प्रेम कहानी शादी के मंडप तक तो पहुंची, लेकिन कानून की दहलीज पर आकर रुक गई।
जानकारी के अनुसार ऊना के एक गांव की 17 वर्षीय किशोरी की जान.पहचान इंस्टाग्राम के माध्यम से दूसरे राज्य में रहने वाले 22 वर्षीय युवक से हुई थी। बातचीत का सिलसिला बढ़ा और दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई। जब दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया तो बात परिजनों तक पहुंची। परिवारों की सहमति से शादी तय कर दी गई और विवाह के कार्ड भी बांट दिए गए। शादी की तैयारियां जोरों पर थीं और रस्में भी शुरू हो चुकी थीं। इसी बीच कुछ ऐसा हो गया कि यह शादी परवान चढ़ने से पहले ही रोक दी गई।
दरअसल इस शादी की सूचना किसी ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दी। जिसमें बताया गया कि गांव में एक 17 साल की लड़की की शादी करवाई जा रही है। सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम हरकत में आई और पुलिस को साथ लेकर सीधे लड़की के घर पहुंच गई। जब यह टीम लड़की के घर पहुंची, तो वहां पर शादी की रस्में चल रही थीं। लेकिन टीम ने मौके पर पहुंच कर शादी की रस्मों को रोक दिया।
अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी दी और समझाया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की की शादी करना कानूनन अपराध है। पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में लड़की और उसके माता.पिता की काउंसलिंग की गई। टीम ने नाबालिग के भविष्य, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
चाइल्ड हेल्पलाइन ऊना की प्रभारी रीना कुमारी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद तुरंत कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि परिवार को कानून के प्रावधानों के बारे में बताया गया, जिसके बाद परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और लिखित रूप से आश्वासन दिया कि बेटी की शादी 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही की जाएगी। बाल कल्याण समिति को भी पूरे मामले की जानकारी दे दी गई है और लड़की की सुरक्षा व भलाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सोशल मीडिया के माध्यम से बन रहे रिश्तों में भावनाओं के साथ-साथ कानूनी और सामाजिक पहलुओं को समझना भी जरूरी है। जहां एक ओर डिजिटल प्लेटफॉर्म युवाओं को जोड़ रहे हैं, वहीं अभिभावकों और समाज की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की उम्र, शिक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें।