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December 7, 2025

हिमाचल में सरेआम परोसा जा रहा नशा : कई नामी कैफे-रेस्टोरेंट में पड़ी रेड, अभी और भी रडार पर

संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर मारी दबिश

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Himachal News

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार नशे पर अपनी जीरो टोलरेंस नीति को पूरी तरह से जमीन पर उतारती हुई दिख रही है। जिसके चलते बीते कल यानी शनिवार को राजधानी शिमला में प्रशासन ने संयुक्त रूप से शहर के विभिन्न इलाकों में अचानक छापे मारे। इस दौरान कई मशहूर कैफे और रेस्टोरेंट्स पर शिकंजा कस दिया। चूंकि, लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि शहर के कुछ प्रतिष्ठान “हर्बल” और “नो-निकोटीन” बताकर ग्राहकों को असल में तंबाकू और निकोटीन परोस रहे हैं।

संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर मारी दबिश

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा युवाओं के बीच नशे पर रोक लगाने के लिए शुरू किए गए “तंबाकू-मुक्त युवा अभियान 3.0” के तहत स्टेट फ्लाइंग स्क्वॉड को विशेष कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा शाखा, आबकारी विभाग और पुलिस ने मिलकर शहर के विभिन्न इलाकों में अचानक छापे मारे। इन कार्रवाइयों के दौरान कैफे मालिक हर्बल कहकर जिन फ्लेवर पैकेटों का इस्तेमाल कर रहे थे

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उन पर स्पष्ट रूप से तंबाकू और निकोटीन की मात्रा लिखी हुई मिली, जबकि आवश्यक स्वास्थ्य चेतावनी पूरी तरह गायब थी। अधिकारियों का कहना है कि यह सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) 2003 की धारा 7 का सीधा उल्लंघन है। जब्त किए गए सभी सामान को कोर्ट में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

हुक्का पीने के खतरे विशेषज्ञों ने बताए

राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रविंदर कुमार ने बताया कि “हर्बल” नाम देकर बेचे जाने वाले अधिकांश मिश्रण भ्रामक होते हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि लगभग 45 मिनट तक हुक्का पीने का नुकसान 100 सिगरेट पीने के बराबर हो सकता है। 

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उन्होंने यह भी कहा कि हुक्के में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा अत्यधिक होती है और एक सत्र में सामान्य सिगरेट की तुलना में लगभग 25 गुना ज्यादा ‘टार’ शरीर में पहुंचता है। हुक्का पाइप साझा करने से टीबी, हेपेटाइटिस और हरपीज जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

राज्य में बड़े स्तर पर होगी निगरानी

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के मिशन निदेशक प्रदीप कुमार ठाकुर ने साफ किया कि यह अभियान सिर्फ शिमला तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि कसोल, मनाली, धर्मशाला और सोलन जैसे क्षेत्रों से भी अवैध हुक्का परोसने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने जोर दिया कि “हर्बल” लिखा होने का मतलब यह नहीं कि वह सुरक्षित है- धुआं और उसका प्रभाव दोनों ही स्वास्थ्य के लिए उतने ही खतरनाक हैं। 

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अब राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर तीन-स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए जा रहे हैं, जो ऐसे प्रतिष्ठानों पर नियमित रूप से कार्रवाई करेंगे। प्रशासन की इस सख्ती के बाद शहर में अवैध हुक्का परोसने वाले कैफे-रेस्टोरेंट्स में हड़कंप मच गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए आने वाले दिनों में और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।

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