#अपराध
October 11, 2025
हिमाचल: बैंक मैनेजर ने किया 3.70 करोड़ का घोटाला, शातिर तरीके से की धोखाधड़ी
कोर्ट ने जमानत याचिका की नामंजूर, पुलिस ने किया गिरफ्तार
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शिमला। आम जनता की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा करने वाला बैंक मैनेजर ही जब रक्षक से भक्षक बन जाए, तो भरोसा डगमगा जाता है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बैंक ऑफ बड़ौदा की कसुम्पटी शाखा में तैनात सीनियर मैनेजर अंकित राठौर को करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
आरोपी पर कृषि उपज विपणन समिति APMC शिमला एंड किन्नौर के खाते से 3.70 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप है। पुलिस ने यह कार्रवाई तब की जब आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी। सूत्रों के अनुसार अंकित ने खुद लिखित में अपराध स्वीकार किया है।
शिकायत के मुताबिक आरोपी ने बैंक में जमा APMC की फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) को निशाना बनाया। उसने 22 और 27 अगस्त को दो चरणों में रकम एक महिला के खाते में ट्रांसफर की। इसके बाद पैसा कई अलग-अलग खातों में बांट दिया गया और बड़ी मात्रा में कैश के रूप में भी निकाल लिया, ताकि रकम का ट्रैक न किया जा सके। इस सुनियोजित साजिश में आरोपी ने न केवल बैंक के भरोसे को तोड़ा, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर लाखों लोगों की मेहनत की कमाई पर चोट पहुंचाई।
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मामला तब सामने आया जब बैंक के आंतरिक ऑडिट में करोड़ों की यह संदिग्ध ट्रांजैक्शन पकड़ी गई। प्रबंधन ने तत्काल जांच शुरू की और शक की सुई सीधे अंकित राठौर पर जाकर रुकी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए बैंक के उप क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश कुमार गाबा ने छोटा शिमला थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई।
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गिरफ्तारी से बचने के लिए अंकित राठौर ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की। लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इतने बड़े आर्थिक अपराध में किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती। इसके बाद पुलिस ने अंकित को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने आरोपी द्वारा ट्रांसफर की गई रकम में से करीब 90.95 लाख रुपये को फ्रीज कर लिया है। वहीं शेष रकम की ट्रैकिंग और घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने रकम को एक महिला के खाते में भेजकर नेटवर्क के माध्यम से आगे वितरित किया। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या इस धोखाधड़ी में अन्य बैंक कर्मचारी या बाहरी लोग भी शामिल थे। जिस पर जनता भरोसा करती है, वही जब गबन करे तो यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, जनता के विश्वास पर सीधा वार है।
यह मामला न केवल बैंकिंग सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि धोखाधड़ी का चेहरा अब सिस्टम के अंदर से भी निकल सकता है। अब जांच एजेंसियों की निगाहें उन सभी कड़ियों पर टिकी हैं जो इस गबन से जुड़ी हैं।