#अपराध
February 12, 2026
हिमाचल : महज 19 की उम्र में नशा तस्कर बना युवक, चरस सप्लाई करने जाते पुलिस ने धरा
पुलिस ने नाके पर पकड़ा 19 साल का युवक
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश आज नशा तस्करी की बढ़ती चुनौती से जूझ रहा है। बीते कुछ वर्षों में प्रदेश में नशीले पदार्थों का कारोबार जिस तेजी से फैला है, उसने समाज, युवाओं और कानून-व्यवस्था तीनों के लिए गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।
प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लगातार नशा तस्करों की गिरफ्तारी हो रही है। कहीं बाहरी राज्यों से आए तस्कर चिट्टा, चरस और स्मैक की खेप के साथ पकड़े जा रहे हैं, तो कहीं स्थानीय युवक भी इस अवैध धंधे का हिस्सा बनते नजर आ रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि नशा तस्करी अब सीमित गिरोहों तक नहीं रही, बल्कि यह एक संगठित नेटवर्क का रूप ले चुकी है।
इसी कड़ी में अब ताजा मामला कुल्लू जिले से सामने आया है- जहां भुंतर पुलिस थाने की टीम ने एक 19 साल के युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम ने युवक से चरस की खेप बरामद की है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस टीम सियुंड क्षेत्र में गश्त पर थी। इसी दौरान पुलिस टीम ने क्षेत्र में नाकाबंदी कर वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी ली जा रही थी। इसी बीच पुलिस टीम को वहां से गुजर रहे युवक की हरकतों पर शक हुआ।
शक के आधार पर युवक की तलाशी ली गई- तो उसके कब्जे से 216 ग्राम चरस बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए खेप को अपने कब्जे में ले लिया और आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान 19 वर्षीय मिलन सिंह के रूप में हुई है- जो कि मनाली के कलाथ गांव का रहने वाला है।

बरामद की गई मात्रा को देखते हुए मामला गंभीर माना जा रहा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत केस दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। प्रारंभिक पूछताछ में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चरस की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किसे सप्लाई किया जाना था। संभावना जताई जा रही है कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।
जिला पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को नशे की दलदल से बचाने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा। साथ ही इस मामले में जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि ऐसे अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि क्षेत्र को नशा मुक्त बनाया जा सके।
विदित रहे कि, पर्यटन स्थलों और राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास नशा तस्करी के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। बाहरी राज्यों से आने वाले तस्कर हिमाचल की भौगोलिक स्थिति और पर्यटकों की आवाजाही का फायदा उठाकर नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहे हैं। कई मामलों में होटल, ढाबे और गेस्ट हाउस भी तस्करों के ठिकाने बनते पाए गए हैं, जहां से युवाओं तक नशा पहुंचाया जा रहा है।
चिंता की बात यह भी है कि कुछ स्थानीय लोग आसान कमाई के लालच में इस दलदल में फंसते जा रहे हैं। बेरोजगारी, नशे की लत और जल्द पैसा कमाने की चाह ने कई परिवारों को बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया है। कई मामलों में एक ही परिवार के दो–तीन सदस्य नशा तस्करी या नशे की गिरफ्त में पाए गए हैं, जो समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।