#अव्यवस्था
December 30, 2025
हिमाचल : डॉक्टरों की हड़ताल ने छीन ली महिला की जिंदगी, कई अस्पताल घुमाई.. नहीं मिला इलाज
'बच सकती थी महिला'- हर जगह बंद मिले इलाज के दरवाजे
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC में डॉक्टर और मरीज के बीच हुए विवाद ने पूरे हिमाचल की स्वास्थ्य सुविधाओं के हालात खराब कर दिए हैं। आलम ऐसा हो गया है कि अस्पताल में डॉक्टरों के ना होने और मरीजों को समय पर इलाज ना मिलने के कारण- एक महिला की मौत हो गई है।
यह घटना राजधानी शिमला के रामपुर उपमंडल में पेश आई है। कुहल ग्राम पंचायत के तलाई गांव से सामने आई यह घटना प्रदेश की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत को उजागर करती है। यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, 56 वर्षीय धर्मदासी रोज की तरह दोपहर करीब 12 बजे अपने खेत में काम कर रही थीं। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसला और वह खेत के समीप स्थित गहरी खाई में गिर गईं।
गिरने से उन्हें गंभीर अंदरूनी चोटें आईं और हालत तेजी से बिगड़ने लगी। आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने किसी तरह उन्हें खाई से बाहर निकाला और तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाने का फैसला किया।
परिजन सबसे पहले घायल महिला को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देओठी लेकर पहुंचे, क्योंकि यही सबसे नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान था। मगर वहां पहुंचने पर पता चला कि डॉक्टर छुट्टी पर हैं और अस्पताल में कोई वैकल्पिक चिकित्सक मौजूद नहीं है।
इमरजेंसी जैसी स्थिति में भी किसी प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध न होना परिजनों के लिए बड़ा झटका था। इसके बाद परिजन धर्मदासी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तकलेच ले गए, जहां बेहतर उपचार की उम्मीद थी। लेकिन यहां भी हालात अलग नहीं थे। CHC जैसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में भी डॉक्टर नदारद मिले। न तो कोई चिकित्सक मौजूद था और न ही घायल महिला को प्राथमिक उपचार देने की कोई व्यवस्था।
लगातार अस्पतालों के चक्कर काटने और समय बीतने के कारण धर्मदासी की हालत और ज्यादा गंभीर हो चुकी थी। अंततः परिजन उन्हें रेफरल अस्पताल रामपुर लेकर पहुंचे। लेकिन दुर्भाग्यवश, वहां उपचार शुरू होने से पहले ही धर्मदासी ने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस घटना ने पूरे तलाई गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। परिजनों का साफ कहना है कि अगर देओठी या तकलेच में समय पर प्राथमिक उपचार मिल जाता, तो शायद धर्मदासी की जान बचाई जा सकती थी। उनका आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य संस्थान केवल कागजों में चल रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल विपरीत है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि-
मामले को लेकर पूर्व भाजपा प्रत्याशी कौल सिंह नेगी और भाजपा मंडल रामपुर के अध्यक्ष नरेश चौहान ने सुक्खू सरकार और स्थानीय विधायक पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक के ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है और अस्पतालों में डॉक्टरों का न होना आम बात बन गया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर नहीं है, जिसका खामियाजा आम ग्रामीणों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
भाजपा नेताओं और स्थानीय लोगों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही मांग उठाई गई है कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जाए, इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत किया जाए और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि अगर अब भी सरकार ने सबक नहीं लिया, तो भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।