#अव्यवस्था
August 5, 2025
वाह हिमाचल! सरकारी स्कूल के पास नहीं है अपना भवन, किराए के क्लासरूम में पढ़ रहे बच्चे
प्रति छात्र 215 रुपये किराया- परिजनों में रोष
शेयर करें:
शिमला। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था के क्या हाल है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि स्कूल की दुर्दशा को देखते हुए किराए के भवन में बच्चों की पढ़ाई चल रही है। लचर व्यवस्था के कारण आज दिन तक स्थायी भवन का निर्माण ही नहीं किया गया, जिसके चलते बच्चों को असुविधा हो रही है।
शिमला जिले के रामपुर स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल नांनन की हालत शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। बीते चार वर्षों से स्कूल के भवन की हालत जर्जर होने के कारण छात्रों को किराए के कमरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
स्थिति यह है कि अभिभावकों को अपने बच्चों की शिक्षा जारी रखने के लिए प्रति छात्र हर महीने 215 रुपये किराया देना पड़ रहा है। वहीं, सरकार के पास भवन निर्माण के लिए 20 लाख रुपये पहले से ही उपलब्ध हैं, लेकिन निर्माण कार्य की शुरुआत अब तक नहीं हो पाई है।
चार साल पहले स्कूल भवन पर समीप की पहाड़ी से पत्थर गिरने की घटना हुई थी, जिससे भवन को गंभीर नुकसान पहुंचा था। इसके बाद भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। तब से लेकर आज तक छात्रों को मजबूरन पास ही के किराए के दो कमरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है। अभिभावकों ने स्थानीय स्कूल कमेटी के साथ मिलकर यह निर्णय लिया था ताकि छोटे बच्चों को दूर गांवों में पढ़ने के लिए न भेजना पड़े।
छात्रों के अभिभावकों से हर महीने प्रति बच्चा 215 रुपये किराया वसूला जा रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बन गया है। स्कूल के पास सरकारी जमीन होने के बावजूद, भवन निर्माण में कोई प्रगति नहीं हो रही है। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।
ग्राम पंचायत बोंडा की प्रधान रीना मेहता ने जानकारी दी कि स्कूल भवन के निर्माण के लिए 20 लाख रुपये की राशि खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) रामपुर के कार्यालय में पहले से ही मौजूद है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग से इस संबंध में कोई ठोस जवाब नहीं आया है। उन्होंने बताया कि संबंधित फाइल शिक्षा विभाग को सौंपी जा चुकी है।
मुख्य अध्यापिका शांति देवी ने बताया कि भवन निर्माण के लिए ज़रूरी सरकारी जमीन पशुपालन विभाग से ट्रांसफर होनी है। इसकी प्रक्रिया लंबे समय से रुकी हुई है। यदि सरकार जल्द से जल्द यह जमीन उपलब्ध करवाती है, तो लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा भवन निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है।
स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) की अध्यक्ष सरोज का कहना है कि यह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। भवन टूट चुका है, खतरा स्पष्ट है, लेकिन सरकार आंखें मूंदे बैठी है। उन्होंने बताया कि सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण में रुचि नहीं दिखाई जा रही।
उपमंडल रोहड़ू का राजकीय प्राथमिक स्कूल ढाक भी खस्ताहाल भवन में चल रहा है। यहां भी विद्यार्थी खतरे के साए में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग को लगातार शिकायतें दी गई हैं, लेकिन समाधान होता नहीं दिख रहा।