#अव्यवस्था
January 3, 2026
गरीब कागजों में अमीर घोषित : हिमाचल में BPL सूची से हजारों परिवार बाहर, कटघरे में सरकार
10 प्रतिशत लोगों का भी नहीं हो पाया दोबारा लिस्ट में सिलेक्शन
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे BPL और अंत्योदय सूचियों के पुनर्गठन ने ग्रामीण इलाकों में गहरी हलचल पैदा कर दी है। सरकार द्वारा शुरू की गई इस प्रक्रिया का लक्ष्य वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना बताया जा रहा है। मगर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है।
कांगड़ा जिले क जसवां परागपुर और देहरा विधानसभा क्षेत्रों में हुई भारी छंटनी ने हजारों गरीब परिवारों को असमंजस और चिंता में डाल दिया है। जसवां परागपुर विधानसभा क्षेत्र में BPL और अंत्योदय सूची पूरी होते ही स्थिति चौंकाने वाली सामने आई है।
पहले जहां इस क्षेत्र में 3237 परिवार BPL श्रेणी में दर्ज थे, अब जांच के बाद केवल 278 परिवारों को ही पात्र माना गया है। इसका मतलब यह है कि 2959 परिवारों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में परिवारों के बाहर होने से ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी और असंतोष का माहौल बन गया है।
देहरा विधानसभा क्षेत्र में भी स्थिति लगभग यही रही। यहां पहले 3946 परिवार BPL सूची में शामिल थे, लेकिन पुनर्गठन के बाद मात्र 195 परिवार ही पात्र ठहराए गए हैं। शेष 3751 परिवारों को अपात्र घोषित कर दिया गया है। अचानक हुए इस बदलाव ने कई ऐसे परिवारों को झटका दिया है जो वर्षों से सरकारी राशन, स्वास्थ्य और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर थे।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ज्यादातर पंचायतों में ग्राम सभाओं का कोरम पूरा नहीं हो पाया। ऐसे में सरकार ने उपमंडल अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और पंचायत निरीक्षक की एक खंड स्तरीय कमेटी गठित कर दी। इस कमेटी को 31 दिसंबर 2025 तक BPL और अंत्योदय सूचियों को अंतिम रूप देने का अधिकार दिया गया। हालांकि, पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि इस व्यवस्था ने स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता को कमजोर किया है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकार द्वारा लागू की गई नई गाइडलाइन इस भारी छंटनी की मुख्य वजह है। नई शर्तों के अनुसार-
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि निर्वाचित पंचायत प्रधानों को पूरी प्रक्रिया से अलग रखा गया और केवल पंचायत सचिव, पटवारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के आधार पर परिवारों का चयन या बहिष्कार किया गया।
घियोरी, जंडौर और वणी पंचायतों के प्रधानों का आरोप है कि महज 50 हजार रुपये वार्षिक आय वाले अत्यंत गरीब परिवारों को भी BPL सूची से बाहर कर दिया गया है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
घियोरी पंचायत में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। यहां कुल 182 परिवारों में से केवल 5 परिवारों को ही BPL सूची में शामिल किया गया है। बाकी परिवारों के लिए यह समझ पाना मुश्किल हो गया है कि वे किस आधार पर अपात्र ठहरा दिए गए।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही की गई है। खंड विकास अधिकारी परागपुर अशोक कुमार के अनुसार, निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले बहुत कम परिवारों ने BPL में शामिल होने के लिए आवेदन किया था- जिनमें से 278 परिवार पात्र पाए गए।
वहीं, देहरा के समाज शिक्षा एवं खंड योजना अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि देहरा विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों से कुल 195 परिवारों का चयन किया गया है और यह चयन भी पूरी तरह सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप है।
उधर, प्रशासन अपने निर्णयों को नियमों के तहत बता रहा है, लेकिन गांवों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि- क्या नई व्यवस्था वास्तव में गरीबों के हित में है। जिन परिवारों के लिए BPL और अंत्योदय योजनाएं जीवन रेखा थीं, उनके लिए अचानक सूची से बाहर होना आर्थिक और सामाजिक दोनों ही स्तर पर बड़ा झटका बन गया है।