#अव्यवस्था
January 19, 2026
सुक्खू सरकार की योजनाओं में बड़ा खेल : 42 हजार मृत और फर्जी लोग भी ले रहे पैसा, रिपोर्ट ने उड़ाए होश
42,867 मृत और अपात्र लोग कई साल से ले रहे थे पैसा
शेयर करें:

शिमला। सरकारी कागजों में जिंदा, लेकिन हकीकत में दुनिया छोड़ चुके हजारों लोग और उनके नाम पर हर महीने सरकारी खजाने से निकलता रहा पैसा। हिमाचल प्रदेश की सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं से जुड़ी जांच में ऐसी ही चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वर्षों तक जिन योजनाओं का उद्देश्य गरीब, बुजुर्ग और असहाय लोगों को सहारा देना था, उन्हीं योजनाओं में बड़े स्तर पर गड़बड़ी उजागर हुई है।
समाज के कमजोर वर्गों को सहारा देने के लिए शुरू की गई योजनाएं ही अब सिस्टम की लापरवाही और खामियों की वजह से फर्जीवाड़े का शिकार हो रही हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि जिन लोगों के नाम पर सरकारी मदद तय की गई, वे या तो इस दुनिया में ही नहीं हैं या फिर कभी पात्र ही नहीं थे, फिर भी वर्षों तक उनके खातों में सरकारी पैसा जाता रहा।
यह गंभीर मामला उस समय सामने आया, जब वित्तीय सुधारों के लिए गठित राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। बैठक में खुलासा हुआ कि सहारा योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना सहित कई अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत मृतकों और फर्जी लाभार्थियों को भी धनराशि आवंटित कर दी गई।
टास्क फोर्स के अध्यक्ष और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक जैन ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता करार देते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह की लापरवाही से सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि मृत और फर्जी लाभार्थियों की जल्द से जल्द पहचान कर उन्हें योजनाओं की सूची से हटाया जाए। इस संबंध में राज्य सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें केंद्र प्रायोजित योजनाओं में लंबित धनराशि की समीक्षा के साथ-साथ राज्य सरकार की योजनाओं में चल रही अनियमितताओं पर रोक लगाने को लेकर मंथन किया गया।
बैठक में यह भी सामने आया कि राज्य सरकार की कई योजनाओं में ऐसे लाभार्थी दर्ज हैं, जिनकी मृत्यु काफी समय पहले हो चुकी है, लेकिन उनके नाम पर भुगतान की प्रक्रिया लगातार जारी रही। इससे न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचने में भी बाधा उत्पन्न हुई।
अब इस फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए सरकार तकनीक का सहारा लेने जा रही है। केंद्र सरकार के महापंजीयक कार्यालय से प्राप्त जन्म और मृत्यु के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर राज्य सरकार योजनाओं के लाभार्थियों के डाटा का मिलान करेगी।
इसके लिए API आधारित सिस्टम और आधुनिक IT टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा। डिजिटल टेक्नोलॉजी एवं गवर्नेंस विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और ESOMAC के आपसी समन्वय से विस्तृत डाटा मैपिंग की जाएगी। डाटा मिलान के बाद संदिग्ध लाभार्थियों की सूची संबंधित विभागों को भेजी जाएगी, जहां उनका भौतिक और दस्तावेजी सत्यापन किया जाएगा।
इससे पहले भी सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में भारी अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। e-kyc प्रक्रिया के दौरान राज्य में 42,867 ऐसे लाभार्थी पाए गए, जो या तो मृत थे या फिर पेंशन के लिए पात्र नहीं थे। इनमें 37,335 मृतक और 5,532 अपात्र लाभार्थी शामिल थे। इस खुलासे पर वित्त सचिव अभिषेक जैन ने कड़ी नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भी इन मामलों को गंभीर बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं इस पूरे प्रकरण पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।
सहारा योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के साथ-साथ अन्य योजनाओं में भी लाभार्थियों का डाटा ऑनलाइन किया जा रहा है, ताकि फर्जीवाड़े की पहचान समय रहते हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि मृतक प्रमाणपत्र को ऑनलाइन अपलोड करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं, जिससे भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोका जा सके।
सरकार का मानना है कि डाटा के डिजिटलीकरण और सख्त निगरानी व्यवस्था के जरिए न केवल सरकारी धन की बचत होगी, बल्कि योजनाओं का वास्तविक लाभ सही और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा।