#अव्यवस्था
December 18, 2025
धर्मशाला में बड़ा स्कैम: करोड़ों की सरकारी जमीन लुटाई, 3 साल से चल रहा था फर्जीवाड़ा
9 इंतकाल रद्द, 32 मामलों पर नजर
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कांगड़ा। जिस जमीन को सरकार की अमानत समझकर संभाला जाना था, वही जमीन नियमों को ताक पर रखकर निजी हाथों में सौंप दी गई। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में सामने आए इस बड़े खुलासे ने पूरे राजस्व विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को कागजों में निजी बना दिया गया और यह खेल चलता रहा तीन साल तक, वो भी विभागीय मदद से। अब जब परतें खुलनी शुरू हुई हैं, तो प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
धर्मशाला तहसीलदार द्वारा की गई विस्तृत जांच में यह साफ हो गया है कि वर्ष 2019 से 2021 के बीच सरकारी जमीन के कई इंतकाल नियमों का उल्लंघन करते हुए किए गए। जांच में सामने आया कि करोड़ों की बेशकीमती भूमि को गलत तरीके से निजी व्यक्तियों के नाम स्थानांतरित किया गया। इस रिपोर्ट के बाद अब प्रशासन ने ऐसे सभी फर्जी इंतकालों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर अब तक 9 फर्जी इंतकालों को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया गया है। इसके साथ ही यह जमीन दोबारा हिमाचल सरकार के नाम दर्ज की जाएगी। प्रशासन की रडार पर कुल 32 इंतकाल हैं, जिनमें से 9 पर कार्रवाई चल रही है, जबकि शेष मामलों की फाइलें बारीकी से खंगाली जा रही हैं।
जांच के दौरान तीन प्रमुख मुहाल सामने आए हैं, जहां सबसे अधिक गड़बड़ियां पाई गईं।
इन सभी मामलों में सरकारी भूमि को निजी मिल्कियत दिखाकर स्थानांतरित किया गया।
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि इन जमीनों के खाता मलकीयत में पहले से ही सरकार का नाम दर्ज था। इसके बावजूद दलालों और कथित तौर पर कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से रिकॉर्ड में हेरफेर कर जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम कर दिया गया। उद्देश्य साफ था — सरकारी जमीन को बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा कमाना।
तहसीलदार गिरिराज ठाकुर की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह पूरा खेल 2019 से 2021 के बीच चला। उस दौरान तैनात फील्ड स्टाफ और कुछ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया। अब प्रशासन उन सभी अधिकारियों और बिचौलियों की पहचान में जुट गया है, जिनकी भूमिका इस घोटाले में संदिग्ध रही है।
9 इंतकाल रद्द होने के बाद उन खरीदारों में भी खलबली मची हुई है, जिन्होंने इन जमीनों में करोड़ों का निवेश कर रखा था। आने वाले दिनों में दोषी पाए गए कर्मचारियों पर विभागीय जांच, कानूनी कार्रवाई और आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की संभावना है। सरकारी संपत्ति को निजी जागीर समझकर लुटाने वालों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है।