#अव्यवस्था
January 15, 2026
हिमाचल में झोलाछाप डॉक्टर : मरीज को लगा रहा था गलत इंजेक्शन, बवासीर की कर चुका है सर्जरी
एक कमरे के अंदर खोल रखा था क्लीनिक- मिली गलत दवाइयां
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर आए दिन कोई ना कोई मामला सामने आता रहता है। आलम ऐसा है कि चंद पैसों के लालच में कई झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला अब चंबा जिले से सामने आया है। जहां स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी कार्रवाई ने ग्रामीण इलाकों में पनप रहे फर्जी इलाज के खतरनाक सच को उजागर कर दिया है। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके के लोगों में चिंता और रोष है।
शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर रेटा गांव में बिना किसी मेडिकल डिग्री और वैध लाइसेंस के चल रहे एक अवैध क्लीनिक का भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई में विभाग की टीम ने खुद को डॉक्टर बताने वाले एक व्यक्ति को मरीज को एक्सपायरी स्टेरॉयड इंजेक्शन लगाते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
स्वास्थ्य विभाग को लंबे समय से इस क्लीनिक को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। बताया जा रहा था कि यहां गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा है और ग्रामीणों को गुमराह कर मोटी रकम वसूली जा रही है। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग की टीम ने अचानक छापेमारी की। जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
क्लीनिक महज एक छोटे से कमरे में संचालित किया जा रहा था, जिसे इलाज केंद्र का रूप दे दिया गया था। कमरे में एलोपैथिक दवाइयों, इंजेक्शनों और सर्जिकल उपकरणों का अवैध स्टॉक रखा हुआ था।
जांच में सामने आया कि आरोपी बिना किसी शैक्षणिक योग्यता के न केवल मरीजों का इलाज कर रहा था, बल्कि बवासीर जैसे मामलों में सर्जरी तक कर चुका था। यह खुलासा सामने आने के बाद विभागीय टीम की चिंता और बढ़ गई।
छापेमारी के दौरान आरोपी एक मरीज को इंजेक्शन लगा रहा था। जब टीम ने इंजेक्शन की जांच की तो वह स्टेरॉयड निकला- जिसकी एक्सपायरी डेट पहले ही खत्म हो चुकी थी। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे इंजेक्शन से मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। समय रहते कार्रवाई न होती तो बड़ा हादसा भी हो सकता था।
टीम ने मौके से करीब 35 हजार रुपये नकद, एक मोबाइल फोन और 52 प्रकार की अलग-अलग दवाइयां जब्त कीं। जांच में यह भी सामने आया कि ये सभी दवाइयां अवैध रूप से खरीदी गई थीं और इनके कोई वैध बिल मौके पर उपलब्ध नहीं थे। कार्रवाई के दौरान स्थानीय निवासी हेम राज, लेख राज, राज कुमार और तेज राम को गवाह के रूप में शामिल किया गया, जिनकी मौजूदगी में पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।
स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर दवाइयों की खरीद-फरोख्त से जुड़ा पूरा ब्योरा मांगा है। विभाग अब उन थोक दवा विक्रेताओं की पहचान में जुट गया है, जिन्होंने बिना पुख्ता दस्तावेजों के इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां सप्लाई कीं। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि आरोपी के खिलाफ औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि इलाज से पहले डॉक्टर की योग्यता और क्लीनिक की वैधता की जांच जरूर करें, ताकि इस तरह के फर्जी इलाज से बचा जा सके।