#राजनीति
January 15, 2026
मंत्री विक्रमादित्य अपनी बात पर अडिग, सहयोगी मंत्रियों की नसीहत पर किया पलटवार
IAS-IPS एसोसिएशन ने भी अपनाया है कड़ा रुख
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार के भीतर अफसरों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। बाहरी राज्यों से आए अधिकारियों को लेकर दिए गए बयानों ने सरकार के भीतर ही टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। इस मुद्दे पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह आमने-सामने आ गए हैं, जिससे कांग्रेस सरकार का आंतरिक गृहकलेश और गहराता नजर आ रहा है।
दरअसल, शिमला में एंटी-चिट्टा अभियान को लेकर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अनिरुद्ध सिंह ने परोक्ष रूप से विक्रमादित्य सिंह पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि अधिकारियों पर कार्रवाई या बयानबाजी कर अपनी प्रशासनिक कमजोरियों को ढंकना सही तरीका नहीं है।
अधिकारी सरकार की रीढ़ होते हैं और उनसे काम लेना नेतृत्व की क्षमता पर निर्भर करता है। इस बयान को विक्रमादित्य सिंह की अफसरों को लेकर की गई टिप्पणी के जवाब के तौर पर देखा गया।

अनिरुद्ध सिंह की इस नसीहत के बाद विक्रमादित्य सिंह ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने अपने ही कैबिनेट सहयोगी को पिछले वर्ष एनएचएआई के एक अधिकारी से जुड़े कथित मारपीट प्रकरण की याद दिलाई। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वे अधिकारियों का सम्मान करते हैं, लेकिन जिस तरह घायल एनएचएआई अधिकारियों का “मान-सम्मान” हुआ, वैसा सम्मान करना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे अपने दोनों वरिष्ठ मंत्रियों का आदर करते हैं, लेकिन हिमाचल के हित में उन्हें अगर सख्त और साफ बात कहनी पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे।
इस बयानबाजी के बाद साफ हो गया है कि अफसरों को लेकर दिया गया बयान विक्रमादित्य सिंह के लिए राजनीतिक रूप से भारी पड़ रहा है। सरकार के भीतर ही कई मंत्री उनके रुख से सहमत नजर नहीं आ रहे।
राजस्व मंत्री जगत सिंह ने भी सार्वजनिक तौर पर उनके बयान से असहमति जता दी है, जबकि अनिरुद्ध सिंह पहले ही उन्हें अफसरों से काम करने का तरीका आने की बात कह चुके हैं। ऐसे में बाहरी राज्यों के अधिकारियों को लेकर की गई टिप्पणी के कारण विक्रमादित्य सिंह सरकार के भीतर लगभग अकेले पड़ते दिख रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह विवाद जल्द नहीं थमता, तो इसका असर न सिर्फ सरकार की एकजुटता पर पड़ेगा, बल्कि प्रशासनिक कामकाज और छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि मंत्री विक्रमादित्य सिंह के साथ किसी भी आईपीएस अधिकारी की ड्यूटी न लगाई जाए। आईपीएस एसोसिएशन का कहना है कि मंत्री द्वारा दिया गया बयान न केवल तथ्यहीन है, बल्कि इससे हिमाचली और गैर-हिमाचली अधिकारियों के बीच अनावश्यक विभाजन पैदा होता है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि आईपीएस एक ऑल इंडिया सर्विस है, जिसका मूल उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और देशभर में निष्पक्ष व पेशेवर प्रशासन सुनिश्चित करना है। अधिकारियों की पहचान उनके राज्य, जन्मस्थान या कैडर से नहीं, बल्कि संविधान और कानून के प्रति उनकी निष्ठा से होती है।