#अव्यवस्था
February 14, 2026
हिमाचल के इस गांव में फैला पीलिया, 117 लोग चपेट में आए; जल शक्ति विभाग की लापरवाही पड़ी भारी !
जल शक्ति विभाग ने कसी कमर, पेयजल टैंकों की सफाई के दिए निर्देश
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां जल शक्ति विभाग की लापरवाही से लगभग पूरा गांव ही पीलिया जॉन्डिस की चपेट में आ गया है। गांव के लगभग 117 लोग पीलिया की बीमारी की चपेट में आ गए हैं। जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। हालांकि अब इसमें कुछ ठीक भी होने लगे हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए जलशक्ति विभाग ने अब सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन शुरुआती जांच में विभागीय लापरवाही भी सामने आई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले लंबे समय से पेयजल टैंकों की समय पर सफाई नहीं की जा रही थी। कई स्थानों पर पाइपलाइन से गंदला और बदबूदार पानी आ रहा थाए जिसकी शिकायतें भी की गईंए लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि दूषित पेयजल ही पीलिया फैलने का मुख्य कारण बना। जल स्रोतों और टैंकों की जांच में कई जगह बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई है।
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स्थिति बिगड़ने के बाद अब जल शक्ति विभाग ने आपात कदम उठाए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी पेयजल स्रोतों की तुरंत सफाई कर क्लोरीनेशन सुनिश्चित किया जाए। फील्ड स्टाफ को नियमित निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं और जल नमूनों की जांच तेज कर दी गई है। प्रभावित इलाकों में वैकल्पिक पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था भी शुरू की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी के टैंकों की महीनों से ठीक से सफाई नहीं हुई थी। कई बावड़ियों और प्राकृतिक स्रोतों के आसपास गंदगी जमा थी। आरोप है कि विभाग ने समय पर निगरानी नहीं की और दूषित जल लोगों तक पहुंचता रहा। सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर सीवरेज या घरेलू गंदा पानी जल स्रोतों के पास बह रहा था, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ गया।
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स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में डेरा डाले हुए हैं। मरीजों का इलाज चल रहा है और घर-घर जाकर लोगों की जांच की जा रही है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया है, जबकि अन्य का उपचार स्थानीय स्तर पर जारी है। डॉक्टरों ने लोगों को उबला हुआ पानी पीने, साफ-सफाई बनाए रखने और लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करवाने की सलाह दी है।
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गांव में बढ़ते आक्रोश के बीच अब यह मांग उठने लगी है कि जल आपूर्ति व्यवस्था में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय पर टैंकों की सफाई और जल स्रोतों की निगरानी होती, तो इतने बड़े स्तर पर बीमारी नहीं फैलती। फिलहाल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी और जवाबदेह व्यवस्था बनाई जाएगी या नहीं।