#अव्यवस्था
May 16, 2025
सुक्खू सरकार की अनदेखी का खामियाजा भुगतेगी आम जनता, थम सकते हैं 108 एंबुलेंस के पहिये
108 और 102 यूनियन ने सुक्खू सरकार को दिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में लोगों के लिए जीवनदायनी बन चुकी 108 और 102 एंबुलेंस सेवा अब कभी भी ठप हो सकती है। दिन रात लोगों की सेवा में जुटे इन एंबुलेंस कर्मचारियों ने अब प्रदेश की सुक्खू सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी लंबित मांगांे को पूरा नहीं किया गया, तो उन्हें मजबुरन हड़ताल पर जाना पड़ेगा।
यूनियन ने सुक्खू सरकार को एक सप्ताह तक का अल्टीमेटम दिया है। अगर सरकार ने उनकी लंबित मांगों को पूरा नहीं किया तो एक सप्ताह बाद प्रदेश भर में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। जिसकी जिम्मेदारी सरकार, नेशनल हेल्थ मिशन के अलावा एंबुलेंस का संचालन कर रही मेडशवान कंपनी की होगी।
जानकारी देते हुए बिलासपुर यूनियन के प्रधान संजीव कुमार और उप प्रधान बीरी सिंह ने बताया कि 108 और 102 एंबुलेंस के कर्मचारी दिन रात काम करते हैं। वह 24 घंटे लोगों की सेवा में जुटे रहते हैं। लेकिन उनके अपने ही अधिकार उन्हें नहीं मिल रहे हैं। प्रधान संजीव कुमार ने बताया कि जब देश दुनिया में कोविड आया था, तब भी इन कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लगातार ड्यूटी निभाई। इसके बाद भी सरकार और मैनेजमेंट कंपनिया उनकी अनदेखी किए जा रहे हैं। पहले जीवीके कंपनी ने उनका शोषण किया और अब मेडशवान कंपनी कर्मचारियों का शोषण कर रही है।
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यूनियन के उपप्रधान वीरी सिंह ने बताया कि एंबुलेंस कर्मचारियांे से 12 12 घंटे ड्यूटी ली जा रही है। जबकि उन्हें लेबर लॉ के अनुसार वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। एंबुलेंस कर्मचारी पिछले 14 साल से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन फिर भी उन्हें स्थायी करने की कोई नीति नहीं बनाई गई है। सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। ऐसे में यूनियन ने अब अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोलने का मन बना लिया है।
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यूनियन ने सुक्खू सरकार के अलावा नेशनल हेल्थ मिशन और संचालन कंपनी को चेतावनी दी है कि अभी वह सिर्फ पेन डाउन स्ट्राइक कर रहे हैं, लेकिन अगर एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों को नहीं माना जाता है तो मजबूरन कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना पड़ेगा। इस दौरान यूनियन ने आम जनता से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यदि भविष्य में एंबुलेंस सेवा बाधित होती है तो लोग कर्मचारियों की मजबूरी को समझें और उनका सहयोग करें। यूनयिन का कहना है कि यह संघर्ष उनके हक और सम्मान के लिए है, जिसे अब और ज्यादा टाला नहीं जा सकता।
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यूनियन ने सुक्खू सरकार को दो टूक कह दिया है कि अगर भविष्य में उनकी मांगें पूरी नहीं होने पर एंबुलेंस सेवा प्रभावित होगाी। ऐसे में अगर आपात स्थिति में किसी की जान जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार सहित संचालन कंपनी की होगी।