कुल्लू। हिमाचल की देवभूमि में कुछ परंपराएं ऐसी हैं, जिन्हें देखने के लिए पीढ़ियां इंतजार करती हैं। कुल्लू की ऊझी घाटी के रूमसू गांव में भी 17 साल बाद ऐसा ही ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन हुआ, जिसका बुधवार को विधिवत समापन हुआ। तीन दिन तक चले काहिका उत्सव के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालु रूमसू पहुंचे और देव परंपरा के सबसे रहस्यमयी विधान के साक्षी बने।
शाम के समय नड़ बदाह देव रीति के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान नड़ नंत राम के मृत होने और फिर दोबारा जीवित होने का विधान किया गया। देव विधि-विधान के बीच हुए इस आयोजन के दौरान पूरा रूमसू देव जयघोष से गूंज उठा।
17 साल बाद देव आदेश पर हुआ आयोजन
रूमसू में काहिका उत्सव का आयोजन देवता शुभ नारायण के आदेश पर किया गया। देवता शुभ नारायण के कारदार परमिंदर सिंह ने बताया कि 17 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद देव आदेश पर काहिका का आयोजन हुआ।
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उन्होंने बताया कि काहिका हिमाचल की प्राचीन देव संस्कृति और देव परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। इस आयोजन के दौरान देव आशीर्वाद लेने और प्राचीन परंपराओं को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु रूमसू पहुंचे।
नड़ बदाह में हुआ रहस्यमयी देव विधान
काहिका के अंतिम दिन सबसे अधिक उत्सुकता नड़ बदाह को लेकर रही। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस विशेष देव विधान को देखने के लिए रूमसू में जुटे।
देव रीति और विधि-विधान के बीच नड़ नंत राम के मृत होने और फिर पुनः जीवित होने का विधान संपन्न किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने इसे देव शक्ति और सदियों पुरानी देव परंपरा के रूप में देखा। पूरा वातावरण देव जयघोष और आस्था से भर गया।
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माता त्रिपुरा सुंदरी तीन दिन रहीं मौजूद
रूमसू काहिका में नग्गर की अधिष्ठात्री माता त्रिपुरा सुंदरी की मौजूदगी ने आयोजन की धार्मिक गरिमा और बढ़ा दी। देव परंपरा के अनुसार माता त्रिपुरा सुंदरी अपने रथ के साथ तीन दिनों तक रूमसू में विराजमान रहीं।
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माता के कारदार जोगिंदर आचार्य ने बताया कि रूमसू काहिका में माता त्रिपुरा सुंदरी की उपस्थिति विशेष महत्व रखती है और उनकी मौजूदगी के बिना यह देव आयोजन पूर्ण नहीं माना जाता।
तीन दिन तक देवमय रही ऊझी घाटी
17, 18 और 19 अगस्त तक चले इस धार्मिक आयोजन के दौरान पूरी ऊझी घाटी में देव संस्कृति की झलक देखने को मिली। काहिका को लेकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह रहा।
17 साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित काहिका के समापन पर रूमसू में उमड़ी हजारों की भीड़ ने इस प्राचीन देव परंपरा के प्रति लोगों की आस्था को भी दिखाया।
