शिमला। हिमाचल प्रदेश के कुछ गांव स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में पूरे देश के लिए मॉडल बन गए हैं। ऐसे गांवों में ढूंढने पर भी कूड़े का तिनका नहीं मिलता और सड़कें सिर्फ रास्ते नहीं, बल्कि साफ-सुथरी आदतों की जीवंत मिसाल हैं।
2019 में राष्ट्रपति से मिला है इस गांव को सम्मान
सोलन जिले का बगौर गांव स्वच्छता के क्षेत्र में पूरे भारत के लिए उदाहरण बन गया है। दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में इसे भारत का सबसे साफ और सुंदर गांव चुना गया। 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पंचायत प्रधान को सम्मानित किया। यहाँ सर्वे टीम को न कूड़ा, न बदबू, न गंदगी मिली। पूरा गांव साफ-सुथरा और व्यवस्थित था।
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शांत वादियों में बसा ये गांव
लाहौल-स्पीति का कौमिक गांव, जो 15 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा है, चारों ओर बर्फीले पहाड़ों, नीले आसमान और शांति से घिरा हुआ है, यहाँ के लोग पर्यावरण के साथ संतुलन बनाए रखते हुए जीवन जीने का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
ये गांव बना रहा 30 सालों से स्वच्छता का रिकॉर्ड
- किन्नौर का रक्षम गांव पिछले 30 साल से स्वच्छता के लिए काम कर रहा है।
- 150 परिवारों को मुफ्त डस्टबिन दिए गए
- हर 10 परिवारों के लिए एक सफाई वार्ड बनाया गया
- वर्दी, मास्क, झाड़ू - लगातार सफाई, नियमित दवा का छिड़काव
- वार्ड में 10 लोगों की कमेटी बनी
- इस गांव ने 2008 में निर्मल ग्राम पुरस्कार और 2015 में महर्षि वाल्मीकि स्वच्छता पुरस्कार जीते।
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किन्नौर के अन्य स्वच्छ गांव
छितकुल, नाको, गियू और ताबो जैसे गांव भी प्रदेश के स्वच्छता मानक पर खरे उतरते हैं। यहाँ लोग प्रकृति और पर्यावरण के साथ जुड़कर जीवन जीते हैं। हिमाचल के ये गांव यह संदेश देते हैं कि स्वच्छता सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
