रिकांगपिओ/शिमला। हिमाचल प्रदेश की सबसे दुर्गम, रोमांचकारी और आस्था से जुड़ी पवित्र तीर्थ यात्राओं में शामिल किन्नौर कैलाश यात्रा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पिछले कई दिनों से यात्रा के आयोजन को लेकर चल रही चर्चाओं और अनिश्चितता के बीच अब प्रशासन ने आधिकारिक रूप से यात्रा की तिथि घोषित कर दी है। इसके साथ ही यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए कई नए नियम और शर्तें भी तय कर दी गई हैं।
भगवान शिव के पवित्र धाम किन्नौर कैलाश के दर्शन के लिए इस वर्ष यात्रा 1 जुलाई से शुरू होकर 30 जुलाई तक चलेगी। यात्रा की तिथियां तय होने के बाद देशभर के शिव भक्तों में उत्साह का माहौल है और श्रद्धालुओं ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
19 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है आस्था का केंद्र
किन्नौर कैलाश हिमाचल प्रदेश के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। समुद्र तल से लगभग 19 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित यह पवित्र स्थल भगवान शिव का निवास माना जाता है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय रास्तों, बर्फीले ट्रैक और प्रतिकूल मौसम का सामना करते हुए यहां पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह यात्रा साहस, धैर्य और शारीरिक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा मानी जाती है।
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बिना मेडिकल फिटनेस नहीं मिलेगी अनुमति
इस बार प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं को सबसे पहले पोवारी स्थित बेस कैंप में अपना पंजीकरण करवाना होगा। पंजीकरण के साथ-साथ प्रत्येक श्रद्धालु का स्वास्थ्य परीक्षण भी अनिवार्य किया गया है। मेडिकल टीम द्वारा शारीरिक रूप से फिट घोषित किए जाने के बाद ही यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और कठिन ट्रैक को देखते हुए यह व्यवस्था यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
एक दिन में 375 श्रद्धालु ही जा सकेंगे
यात्रा मार्ग पर भीड़भाड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन ने प्रतिदिन जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी तय कर दी है। नए नियमों के अनुसार अब एक दिन में अधिकतम 375 श्रद्धालुओं को ही किन्नौर कैलाश यात्रा पर जाने की अनुमति मिलेगी। इससे यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और प्रबंधन बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।
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गाइडों के लिए भी लागू होंगे सख्त नियम
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करने वाले गाइडों के लिए भी इस बार विशेष नियम बनाए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण कोई भी व्यक्ति गाइड के रूप में कार्य नहीं कर सकेगा। सभी गाइडों को प्रशासन के पास अपना पंजीकरण करवाना होगा, जिसके बाद उन्हें आधिकारिक पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। केवल अधिकृत पहचान पत्र वाले गाइड ही यात्रा अवधि के दौरान श्रद्धालुओं के साथ जा सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य अवैध रूप से ट्रैकिंग और गाइड सेवाएं देने वालों पर रोक लगाना है।
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पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति पर विशेष ध्यान
इस बार यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय परंपराओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। प्रशासन ने यात्रा मार्ग और धार्मिक स्थल के आसपास स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे प्लास्टिक और अन्य कचरा खुले में न फेंकें तथा पवित्र स्थल की गरिमा बनाए रखें।
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देव सभाएं भी रखेंगी निगरानी
यात्रा के सफल संचालन में स्थानीय देव सभाओं की भूमिका भी अहम रहेगी। प्रशासन ने निर्णय लिया है कि देव सभाएं यात्रा व्यवस्था की निगरानी करेंगी और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण में सहयोग देंगी। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से आवश्यक सुविधाएं और सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
