मंडी। देवभूमि हिमाचल प्रदेश अपने प्राचीन मंदिरों, देवी-देवताओं और अनूठी धार्मिक परंपराओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इन्हीं आस्थाओं के बीच मंडी जिले की ऊंची पहाड़ियों में स्थित वर्षा देवता और क्षेत्र के आराध्य बड़ा देव कमरूनाग की पवित्र झील एक बार फिर श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा का केंद्र बनी रही।

 

मान्यता है कि इस झील में वर्षों से श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया सोना, चांदी, कीमती आभूषण और नकदी मौजूद है। कहा जाता है कि मनोकामना पूरी होने पर भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार बहुमूल्य वस्तुएं इस झील को समर्पित करते हैं। इसी वजह से यह झील आस्था के साथ-साथ रहस्य और आकर्षण का भी केंद्र बनी हुई है।

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सवा लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने टेका माथा

आषाढ़ संक्रांति के अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक दो दिवसीय सरनाहुली मेले में इस बार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंडी समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों से पहुंचे सवा लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बड़ा देव कमरूनाग के दरबार में हाजिरी लगाई। मेले के अंतिम दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरा क्षेत्र देव कमरूनाग के जयकारों से गूंजता रहा और भक्त घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

 

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मन्नत पूरी होने पर झील में अर्पित किए गहने और नकदी

श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार पहले पवित्र झील की परिक्रमा की और फिर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर सोना, चांदी, आभूषण तथा नकदी झील में अर्पित की।  इसके चलते पवित्र झील पूरी तरह सोने-चांदी से लबालब नजर आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के कारण झील के भीतर बेहिसाब धन-संपत्ति मौजूद है। हालांकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन आस्था से जुड़े लोगों का मानना है कि झील में अरबों रुपये मूल्य का सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं मौजूद हो सकती हैं।

खराब मौसम भी नहीं डिगा सका श्रद्धालुओं का विश्वास

मेले के दौरान मौसम कई बार चुनौती बनकर सामने आया। दिनभर वर्षा और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। बारिश के बीच भी भक्त पवित्र झील तक पहुंचे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना करते रहे। श्रद्धालुओं का कहना था कि देव कमरूनाग में उनकी अटूट आस्था है और मौसम उनके विश्वास को नहीं डिगा सकता।

 

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झील से जुड़ी हैं रहस्यमयी मान्यताएं

कमरूनाग झील और मंदिर का इतिहास सदियों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार झील में समर्पित किए गए धन और आभूषणों को कभी बाहर नहीं निकाला जाता। ग्रामीणों का विश्वास है कि यह खजाना स्वयं देव शक्तियों की निगरानी में सुरक्षित है। ऐसी मान्यता भी प्रचलित है कि यदि कोई व्यक्ति इस धन को निकालने का प्रयास करता है तो उसे अशुभ परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि वर्षों से झील में जमा संपत्ति को किसी ने छूने का प्रयास नहीं किया।

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देववाणी सुनने उमड़ी भीड़

मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गूर के माध्यम से देववाणी भी सुनी। लोगों ने अपनी समस्याओं और जीवन से जुड़े सवालों के समाधान के लिए देव आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा सैकड़ों परिवारों ने अपने बच्चों के मुंडन संस्कार भी करवाए। पूरे क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

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प्रशासन और पुलिस ने संभाली व्यवस्था

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए थे। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न मार्गों पर विशेष प्रबंध किए गए थे। प्रशासन के अनुसार पूरा मेला शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। मेले के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई और श्रद्धालुओं ने सुरक्षित रूप से धार्मिक आयोजन में भाग लिया।

आस्था, परंपरा और रहस्य का अनोखा संगम

कमरूनाग झील केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि हिमाचल की सदियों पुरानी आस्था, लोक परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं का जीवंत प्रतीक है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर अपनी मनोकामनाएं देवता के चरणों में अर्पित करते हैं और पूरी होने पर झील में सोना-चांदी समर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। यही वजह है कि यह पवित्र झील आज भी देवभूमि हिमाचल के सबसे अनोखे और चर्चित धार्मिक स्थलों में गिनी जाती है।

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