कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला के खनियारा गांव में शिवजी अघंजर महादेव के रूप में विराजमान हैं। सावन का महीना चल रहा है इसलिए हम आपको बता रहे हैं भगवान शिव के एक ऐसे प्राचीन मंदिर के बारे में जिसका इतिहास पांडवों से जुड़ा है।
शिव को कहा गया है अघंजर
जो पापों का नाश करता है उसे अघंजर कहा जाता है। शिव भी दुष्टों को खत्म कर देते हैं इसीलिए यहां उन्हें ही अघंजर कहा गया है। बता दें कि अघंजर एक संस्कृत शब्द है।
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अर्जुन को दिए थे दिव्य दर्शन
बताया जाता है कि महाभारत के वक्त अर्जुन ने इसी मंदिर में तप किया था। यहां उन्हें खुद भगवान शिव ने दर्शन दिए। इसी दौरान अर्जुन को पशुपति अस्त्र प्राप्त हुआ था।
चट्टान के नीचे प्राचीन शिवलिंग
मंदिर के पास मांझी खड्ड बहती है। इसी खड्ड के पास एक चट्टान है जिसके नीचे एक प्राचीन शिवलिंग है। इसे गुप्तेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। यहां मेला भी लगता है जिसमें दूरदराज से आए श्रद्धालु भाग लेते हैं।
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500 से ज्यादा वर्षों से जल रहा धूना
ऐसा कहा जाता है कि राजा रणजीत सिंह को उदर रोग हो गया था। वे बाबा गंगा भारती की कुटिया में उनसे मिले। बाबा ने उनके रोग को अपने धूने की विभूति से ठीक कर दिया था। यू धूना 500 सालों से भी ज्यादा वर्षों से निरंतर जलता आ रहा है।
स्थान नहीं अनुभव है ये मंदिर
आजकल मंदिर स्थल भी पर्यटन स्थल बन गए हैं लेकिन अघंजर महादेव में ऐसा नहीं हैं। यहां की हवा कुछ अलग है। महाभारत काल के इस मंदिर में जब आरती होती है तो श्रद्धालुओं का अनुभव विस्मरणीय होता है।
