हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश पर लगातार बढ़ते कर्ज के बोझ को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए हिमाचल की बिगड़ती वित्तीय स्थिति के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार ने अपने कार्यकाल में जिस तरह लगातार कर्ज लिया है, उससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है और सरकार ने हिमाचल की आने वाली पीढ़ियों पर भी कर्ज का बोझ डाल दिया है।

51 हजार करोड़ से बढ़कर 1.10 लाख करोड़ पहुंचा कर्ज

अनुराग ठाकुर ने केंद्रीय वित्त मंत्री की ओर से सामने आए आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की कुल बकाया देनदारियां वर्ष 2018 में 51,030 करोड़ रुपये थीं, जो वर्ष 2026 के बजट अनुमान में बढ़कर 1,10,010 करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों में देनदारियों में हुआ यह भारी इजाफा प्रदेश की वित्तीय स्थिति की गंभीर तस्वीर सामने रखता है।

 

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अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश की आमदनी बढ़ाने और आर्थिक संसाधनों को मजबूत करने के बजाय लगातार उधारी लेने पर केंद्रित हो गई है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति आगे भी जारी रही तो इसका सीधा असर प्रदेश के विकास और आम जनता पर पड़ेगा।

पहली बार ओवरड्राफ्ट तक पहुंचा हिमाचल

सांसद ने कहा कि हिमाचल की वित्तीय स्थिति का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि वर्ष 2025 में प्रदेश ओवरड्राफ्ट की स्थिति में पहुंच गया। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2018 से 2024 तक हिमाचल प्रदेश ने वेज एंड मीन्स एडवांस और ओवरड्राफ्ट के मामले में शून्य शेष बनाए रखा था। लेकिन वर्ष 2025 में स्थिति बदल गई। प्रदेश को 777 करोड़ रुपये के वेज एंड मीन्स एडवांसेज पर निर्भर होना पड़ा, जबकि 875 करोड़ रुपये का ओवरड्राफ्ट भी लेना पड़ा। अनुराग ठाकुर ने इसे प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी करार दिया।

 

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कर्ज का बोझ बढ़ता गया, उधारी का सिलसिला नहीं रुका

अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति को समझने के लिए लगातार लिए जा रहे नए कर्ज के आंकड़े भी काफी महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार वर्ष 2024-25 में हिमाचल ने 7,359 करोड़ रुपये, वर्ष 2025-26 में 9,864 करोड़ रुपये और 31 जुलाई 2026 तक ही 2,800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती उधारी यह सवाल खड़ा करती है कि सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्या कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की आर्थिक व्यवस्था में आय के नए स्रोत तैयार करने की बजाय कर्ज लेकर खर्च चलाने का रास्ता ज्यादा दिखाई दे रहा है।

 

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राष्ट्रीय औसत से भी काफी ज्यादा डेब्ट-टू-GSDP रेश्यो

सांसद ने हिमाचल के डेब्ट-टू-GSDP रेश्यो को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 के बजट अनुमान में हिमाचल प्रदेश का डेब्ट-टू-GSDP रेश्यो 42.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का राष्ट्रीय औसत 29.2 प्रतिशत है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय औसत की तुलना में हिमाचल का अनुपात काफी अधिक होना प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर गंभीरता से मंथन करने की जरूरत है कि कर्ज लगातार बढ़ने की स्थिति को कैसे रोका जाए।

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‘सरकार ने सिर्फ वर्तमान नहीं, भविष्य भी कर्ज में डाला’

अनुराग ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर सबसे बड़ा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि सरकार ने अपने कार्यकाल में इतना कर्ज ले लिया है कि इसका बोझ केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाली पीढ़ियों को भी इस कर्ज की कीमत चुकानी पड़ेगी।

 

उन्होंने कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी होती है कि वे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएं, रोजगार और निवेश के अवसर पैदा करें तथा आय के स्थायी स्रोत विकसित करें। लेकिन यदि सरकार लगातार कर्ज लेकर खर्च चलाती है तो उसका भुगतान भविष्य में प्रदेश के लोगों को करना पड़ता है।

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‘कर्ज बढ़ाना आर्थिक मॉडल नहीं हो सकता’

सांसद ने कहा कि मौजूदा आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश सरकार का आर्थिक मॉडल राजस्व बढ़ाने के बजाय कर्ज बढ़ाने पर निर्भर हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की नीतियों का खामियाजा हिमाचल की जनता को भुगतना पड़ रहा है। अनुराग ठाकुर ने सरकार से प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने और यह बताने की मांग की कि बढ़ते कर्ज को नियंत्रित करने के लिए सरकार के पास क्या ठोस योजना है।

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