चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की रहने वाली स्टार धाविका सीमा कुमारी जल्द ही अपनी जिंदगी के नए सफर की शुरुआत करने जा रही हैं। सीमा ने 19 अक्तूबर को एथलीट अमन कुमार के साथ सगाई कर ली। चंबा के एक निजी होटल में सगाई की रस्में पूरी हुईं। सीमा ने खुद सोशल मीडिया पर सगाई की तस्वीरें शेयर कर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी साझा की।

किसके साथ हुई सीमा की सगाई

जानकारी के मुताबिक, चंबा के चुराह की रहने वाली सीमा की सगाई का कार्यक्रम सरोल स्थित एक होटल में हुआ। सीमा ने सोशल मीडिया पर अपने फैंस के साथ यह खुशखबरी शेयर की। बताया जा रहा है कि उनकी सगाई मंडी जिले के सुंदरनगर के बल्ह निवासी एथलीट अमन कुमार से हुई है। दोनों 2028 ओलंपिक के बाद शादी करने की तैयारी में हैं।

 

 

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सीमा ने जैसे ही सगाई की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं, उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया। लोगों ने उनके नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीं और भविष्य में भी देश के लिए मेडल जीतने की कामना की।

 

सीमा के खास लोगों ने भी दी बधाई

सीमा के करियर में अहम भूमिका निभाने वाले संजीव सूरी ने भी सगाई की तस्वीर शेयर कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने सीमा को जिंदगी के नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीं। सीमा ने भी पोस्ट पर लिखा कि जिंदगी में एक नया सफर शुरू हो रहा है और यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण फैसला है।

 

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चंबा के विधायक नीरज नैयर ने भी सीमा को बधाई दी। सोशल मीडिया पर लोगों ने भी जमकर शुभकामनाएं दीं। कई यूजर्स ने कहा कि अब उनकी नजर 2028 ओलंपिक में सीमा से मेडल की उम्मीद पर है।

कौन हैं सीमा के मंगेतर अमन कुमार?

मंडी जिले के बल्ह के नागचला निवासी अमन कुमार भी एथलीट रह चुके हैं। सीमा और अमन की पहली मुलाकात करीब 10 साल पहले धर्मशाला में एक खेल प्रतियोगिता के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच दोस्ती हुई और करीब 10 साल तक दोनों रिलेशनशिप में रहे।

 

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अमन अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। फिलहाल वह धर्मशाला में फोरेंसिक विभाग में सहायक वैज्ञानिक के पद पर तैनात हैं। उनके पिता पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर हैं और इस समय बैजनाथ में तैनात हैं।

 

सीमा ने 16 साल बाद भारत को दिलाया एशियाड मेडल

सीमा कुमारी ने जापान में हुए एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 10 हजार मीटर रेस में कांस्य पदक जीता। उन्होंने 32:50.05 सेकेंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। इस पदक के साथ सीमा ने 10 हजार मीटर दौड़ में भारत का 16 साल का मेडल का सूखा खत्म किया।

 

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चुराह के छोटे से गांव से निकलीं सीमा

सीमा चंबा के चुराह के रेटा गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता का करीब 14 साल पहले निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने ही छह बच्चों की परवरिश की। सीमा जब सातवीं कक्षा में थीं, तब बेहतर ट्रेनिंग के लिए धर्मशाला के साई हॉस्टल चली गई थीं।

 

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सीमित संसाधनों के बावजूद सीमा ने मेहनत जारी रखी और दौड़ में अपना नाम बनाया। साल 2018 में वह खेलो इंडिया योजना से भी जुड़ीं। इसके बाद उन्होंने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल कीं।

2024 में जीता था 10 हजार मीटर का गोल्ड

साल 2024 में हांगकांग में हुई 17वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में सीमा ने 10 हजार मीटर में स्वर्ण पदक जीता था। विश्व एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में उनका नाम चार बार की राष्ट्रीय चैंपियन और एशियन यूथ ओलंपिक की रजत पदक विजेता के तौर पर दर्ज है।

 

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एशियन गेम्स से पहले इसी साल सीमा ने 10 हजार मीटर में 32:02.43 सेकेंड का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय भी दर्ज किया था। यह समय एथलेटिक्स फेडरेशन और वर्ल्ड एथलेटिक्स के रिकॉर्ड में उनका पर्सनल बेस्ट है।