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June 9, 2026
हिमाचल : फौजी के बेटे ने बढ़ाया मान, LOC में दुश्मनों पर दागी गो.लियां- वीर चक्र से हुआ सम्मानित
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया
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मंंडी। हिमाचल प्रदेश के पांच वीर सपूतों ने देश की रक्षा के लिए अपने अदम्य साहस, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। इन जांबाज सैनिकों को उनकी असाधारण बहादुरी के लिए सेना के प्रतिष्ठित वीर चक्र और शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन वीरों को सम्मानित किया। इस सम्मान सूची में मंडी, बिलासपुर, शिमला और ऊना के पांच सैन्य अधिकारियों और जवानों के नाम शामिल हैं। इनमें बिलासपुर के वीर बलदेव चंद को मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया गया।
मंडी जिले के मकरीड़ी क्षेत्र के समोहली गांव निवासी नायब सूबेदार सतीश कुमार को वीरता के लिए देश के प्रतिष्ठित सैन्य अलंकरण वीर चक्र से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
नायब सूबेदार सतीश कुमार वर्तमान में चौथी बटालियन डोगरा रेजिमेंट में सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें दुश्मन की भारी गोलीबारी के बीच दिखाई गई असाधारण बहादुरी, उत्कृष्ट सैन्य कौशल और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए यह सम्मान दिया गया।
जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास दुश्मन की ओर से लगातार भारी गोलीबारी की जा रही थी। चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद नायब सूबेदार सतीश कुमार ने अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए साहसिक कार्रवाई की।
उन्होंने जोखिम उठाकर दुश्मन के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया और उन्हें ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई से दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचा और भारतीय सेना को सामरिक बढ़त मिली।
नायब सूबेदार सतीश कुमार के पिता नंद लाल स्वयं पूर्व सैनिक रह चुके हैं, जबकि उनकी माता कृष्णा देवी गृहिणी हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती पंजाब के अबोहर क्षेत्र में है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे मंडी जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।
राष्ट्रपति भवन में सम्मानित हुए हिमाचल के इन पांच वीर सपूतों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देवभूमि आज भी देश को ऐसे बहादुर जवान दे रही है जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए हर चुनौती का सामना करने को तैयार रहते हैं। इन सम्मानित सैनिकों की वीरगाथाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।