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February 12, 2026
हिमाचल के बेटे ने छोड़ी लाखों के पैकेज की नौकरी, सेना में लेफ्टिनेंट बन पूरा किया सपना
हिमाचल के साहिल ने देशभर में 16वां रैंक हासिल कर रचा इतिहास
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मंडी। हिमाचल के मंडी जिले के एक छोटे से गांव से निकले युवा ने यह साबित कर दिया कि हिमाचल की मिट्टी में देशभक्ति रची.बसी है। जहां आज के दौर में युवा बड़ी कंपनियों के आकर्षक पैकेज को सफलता का पैमाना मानते हैं, वहीं मंडी के दिगोह गांव के साहिल ठाकुर ने वर्दी पहनकर देश सेवा करने के अपने बचपन के सपने को पूरा करने के लिए लाखों रुपये सालाना की कॉर्पोरेट नौकरी ठुकरा दी। अब वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में देश की सेवा करेंगे।
साहिल ठाकुर ने सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (SSB) की कठिन चयन प्रक्रिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया स्तर पर 16वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट पद के लिए अपनी जगह पक्की की। जल्द ही वे ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में प्रशिक्षण के लिए रवाना होंगे, जहां से वे एक कमीशंड अधिकारी के रूप में निकलेंगे।
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साहिल ने सोलन स्थित जेपी यूनिवर्सिटी ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से बीटेक (कंप्यूटर साइंस) की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के बाद उनका चयन एक मल्टीनेशनल कंपनी में हुआ, जहां उन्हें आकर्षक पैकेज की पेशकश मिली। लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया की चमक-दमक भी उनके भीतर के देशसेवक को नहीं रोक सकी। उन्होंने तय किया कि उनका असली लक्ष्य सेना की वर्दी पहनना है, और इसी संकल्प के साथ उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
साहिल के पिता कुलदीप ठाकुर भारतीय सेना में सूबेदार मेजर के पद पर कार्यरत हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता को वर्दी में देखा और उसी राह पर चलने का सपना संजोया। उनकी माता सुमन ठाकुर गृहिणी हैं, जिन्होंने हर कदम पर बेटे का हौसला बढ़ाया। परिवार की सैन्य पृष्ठभूमि ने साहिल के भीतर देश सेवा की भावना को और मजबूत किया।
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साहिल की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल ग्रेहो से हुई, जबकि उन्होंने जमा-2 की पढ़ाई डीपीएस डल्हौजी से पूरी की। वे शुरू से ही मेधावी छात्र रहे। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने माता-पिता, दादा स्वर्गीय गोविंद राम, दादी ब्रह्मी देवी, भाई सार्थक ठाकुर, ताया पवन कुमार और अपने शिक्षकों को दिया है, जिन्होंने हर मोड़ पर उनका मार्गदर्शन किया।
साहिल की इस उपलब्धि से उनके गांव दिगोह सहित पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। रिश्तेदारों और ग्रामीणों द्वारा उन्हें लगातार बधाइयां दी जा रही हैं। युवाओं के लिए वे प्रेरणा बन गए हैं कि यदि इरादे मजबूत हों तो कोई भी सपना दूर नहीं। साहिल ठाकुर की कहानी सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की मिसाल है जिसमें देशसेवा को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। लाखों के पैकेज की नौकरी छोड़कर सेना की वर्दी चुनना यह दर्शाता है कि हिमाचल के युवाओं में देशभक्ति का जज़्बा आज भी उतना ही प्रबल है, जितना कभी था।