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August 2, 2025

हिमाचल की बेटी सुष्मिता बनी नर्सिंग ऑफिसर, लेफ्टिनेंट परीक्षा में भी हासिल की थी सफलता

नर्सिंग लेफ्टिनेंट को छोड़ चुनी नर्सिंग ऑफिसर की राह

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bilaspur susmita thakur

बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश की बेटियां आज हर क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं और देश.दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है बिलासपुर जिले की ग्राम पंचायत चांदपुर की बेटी सुष्मिता ठाकुर नेए जिन्होंने राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय ;जीएमसीएचद्धए चंडीगढ़ में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर नियुक्त होकर अपनी मेहनत और संघर्ष की मिसाल कायम की है। सुष्मिता की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार में हर्ष का माहौल हैए बल्कि पूरे क्षेत्र में भी खुशी और गर्व की लहर है। उनका यह सफर कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।

इन परीक्षाओं में भी हासिल की थी सफलता

बड़ी बात यह है कि सुष्मिता ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नर्सिंग लेफ्टिनेंट, नर्सिंग ऑफिसर, और जीएमसीएच चंडीगढ़ में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सभी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की और विभिन्न संस्थानों से नियुक्ति पत्र भी मिले। परंतु, उन्होंने जीएमसीएच चंडीगढ़ को प्राथमिकता दी और वहीं नर्सिंग ऑफिसर का पदभार ग्रहण किया।

 

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सादा परिवेश, ऊंचे सपने

सुष्मिता एक साधारण परिवार से संबंध रखती हैं। उनकी माता लीला देवी ठाकुर एक गृहिणी हैं, जबकि पिता गज्जन सिंह ठाकुर एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। सुष्मिता ने अपनी शुरुआती शिक्षा राजकीय प्राथमिक पाठशाला नखलेहड़ा से हासिल की। इसके बाद छठी से दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चांदपुर, और 11वीं 12वीं की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक छात्रा पाठशाला बिलासपुर से पूरी की।

कहां से की नर्सिंग की डिग्री

आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने जिले के ही एक निजी नर्सिंग संस्थान से बीएससी नर्सिंग की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने यह तय कर लिया था कि उन्हें स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में कुछ ऐसा करना है, जिससे समाज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दी जा सके।

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सेवा और संघर्ष का मिला फल

अपनी डिग्री पूरी करने के बाद सुष्मिता ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कोठीपुरा और तरेड़ स्थित हैल्थ एंड वैलनेस सेंटरों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सेवा करते हुए व्यावहारिक अनुभव भी हासिल किया।

 

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बेटियों की उड़ान को सलाम

सुष्मिता ठाकुर का कहना है कि उनकी इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता और शिक्षकों का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे अपनी सफलता का संपूर्ण श्रेय उन्हें ही देती हैं। उनका मानना है कि दृढ़ निश्चय, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।

 

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प्रदेश की बेटियों का बढ़ता आत्मबल

आज हिमाचल की बेटियां चिकित्साए शिक्षाए प्रशासनए सेनाए खेल और तकनीकी क्षेत्रों में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। सुष्मिता ठाकुर की सफलता इस बात का प्रमाण है कि अगर अवसर और समर्थन मिलेए तो बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल चांदपुर पंचायत बल्कि पूरे हिमाचल के लिए गर्व की बात है। यह संदेश भी देती है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली बेटियां भी अपने सपनों को साकार कर सकती हैं, बशर्ते वे मेहनत और लगन से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें।

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