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January 12, 2026

मकर संक्रांति 2026: इस बार लोहड़ी के अगले दिन नहीं बना पाएंगे खिचड़ी, जानें क्या हैं कारण

एकादशी पर नहीं बनते है चावल 

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Makar Sankranti 2026,

शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस साल का पहला बड़ा पर्व मकर संक्रांति आने वाला है। इस दिन सबसे खास परंपरा है खिचड़ी बनाना, जिसे लोग धार्मिक विश्वास और परंपरा के अनुसार घरों और मंदिरों में बनाते हैं। कई जगहों पर खिचड़ी के लंगर भी लगाए जाते हैं, ताकि सभी लोग इसे एक साथ खा सकें। लेकिन इस बार कुछ ऐसा संयोग बना है कि लोगों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। लोग सोच रहे हैं कि इस बार खिचड़ी बनाना ठीक रहेगा या नहीं। इस दुविधा के बीच, लोग परंपरा और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए सही निर्णय लेने की कोशिश कर रहे हैं।

एकादशी पर नहीं बनते है चावल 

हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। लेकिन इस साल 2026 में मकर संक्रांति षटतिला एकादशी के साथ पड़ रही है। इससे श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल पैदा हो गया है कि क्या इस बार मकर संक्रांति पर पारंपरिक खिचड़ी बनाई जा सकेगी या नहीं। दरअसल, एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित माना जाता है, जबकि मकर संक्रांति पर चावल से बनी खिचड़ी बनाना और दान करना परंपरा का हिस्सा है। इसलिए इस साल खिचड़ी को लेकर लोग उलझन में हैं।

 

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एकादशी का समय

वही, कालीबाड़ी मंदिर के पुजारी मुक्ति चक्रवर्ती के अनुसार, 14 जनवरी को सूर्य देव दोपहर 3:07 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन षटतिला एकादशी भी है, जो सुबह 3:18 बजे शुरू होकर शाम 5:53 बजे तक रहेगी। एकादशी के दौरान चावल का सेवन या चावल से बनी सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकता, इसलिए खिचड़ी इस दिन नहीं बनाई जा सकेगी।

एकादशी का समय

कालीबाड़ी मंदिर के पुजारी मुक्ति चक्रवर्ती के मुताबिक, इस साल 14 जनवरी को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन षटतिला एकादशी भी है, जो सुबह से शुरू होकर शाम तक रहेगी। इस एकादशी के दौरान चावल और उससे बनी कोई भी चीज़ खाने की मनाही होती है, इसलिए इस दिन पारंपरिक खिचड़ी नहीं बनाई जा सकेगी।

 

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खिचड़ी अगले दिन या नहीं?

इस पर लोगों में दो राय है। कुछ का मानना है कि खिचड़ी एकादशी खत्म होने के बाद 15 जनवरी को बनाई जानी चाहिए। वहीं कुछ लोग इसे बनाए बिना ही मकर संक्रांति मनाएंगे, लेकिन स्नान और दान के नियमों का पालन करेंगे। पुजारी मुक्ति चक्रवर्ती कहते हैं कि ये अवसर बहुत खास है। 

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करीब 19 साल बाद ऐसा संयोग आया है जब मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही है। इसलिए खिचड़ी बनाना चाहते लोग एकादशी समाप्त होने के बाद अगले दिन यह कार्य कर सकते हैं। पंचांग के अनुसार, एकादशी की तिथि शाम 5:52 बजे खत्म हो जाएगी और तब खिचड़ी बनाकर दान भी किया जा सकेगा।

तिल और साबूदाने से भी पालन संभव

एकादशी के कारण भले ही चावल की खिचड़ी न बने, लेकिन श्रद्धालु तिल और साबूदाने का इस्तेमाल करके भी पर्व का पालन कर सकते हैं। इस दिन तिल के लड्डू, तिल का दान या साबूदाने की खिचड़ी बनाकर व्रत और पर्व दोनों का पालन किया जा सकता है। पुजारी पवन देव शर्मा बताते हैं कि इस दिन स्नान, कंबल, घी और तिल का दान करने से विशेष पुण्य फल मिलता है।

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मकर संक्रांति का नाम ‘मंदाकिनी’

इस साल की मकर संक्रांति में कई शुभ योग बन रहे हैं, जैसे वृद्धि योग, ध्रुव योग और अनुराधा नक्षत्र, जो पुण्य कर्मों का फल बढ़ाते हैं। एकादशी का पालन करने वाले श्रद्धालु सूर्योदय के बाद स्नान और दान कर पारण करेंगे। बता दें कि धार्मिक पंचांग के अनुसार, इस साल की मकर संक्रांति को ‘मंदाकिनी’ नाम दिया गया है। इस दिन सूर्य देव पीत वस्त्र धारण करेंगे और बाघ पर आरूढ़ होंगे। उनका उपवाहन घोड़ा रहेगा। इसे समृद्धि और शुभ फल देने वाला माना जाता है। 

दान, पुण्य और अच्छे कर्म करना मकर संक्रांति का उद्देश्य

चाहे खिचड़ी बने या न बने, मकर संक्रांति का मूल उद्देश्य दान, संयम और पुण्य कर्म है। पुजारियों का कहना है कि श्रद्धालु भ्रम में न पड़ें, बल्कि धर्म और परंपरा के अनुसार सरल और सहज तरीके से पर्व मनाएं।

 

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