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December 20, 2025

हिमाचल: किसान के बेटे का भारतीय सेना में हुआ चयन, बिना कोचिंग हासिल की सफलता 

पिता करते हैं किसानी, मां है गृहिणी, कड़ी मेहनत से हासिल किया मुकाम

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sirmaur youth indian army

नाहन। हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के साथ साथ वीरभूमि भी कहा जाता है। यहां के युवाओं में वर्दी पहन कर देश सेवा का जज्बा कूट कूट कर भरा रहता है। हर साल सैंकड़ों युवा सेना में भर्ती होकर मातृभूमि की रक्षा करने की कसम खाते हैं। ऐसा ही एक युवा हिमाचल के सिरमौर जिला का भी है। जिसने कड़ी मेहनत और लग्न से भारतीय सेना की वर्दी हासिल कर ली है। यह बेटा अब मातृभूमि की रक्षा करने को तैयार है।

अग्निवीर भर्ती हुआ अभिषेक

सिरमौर जिला के राजगढ़ ब्लॉक के गांव कूफर मटलोड़ी के अभिषेक का चयन भारतीय सेना में बतौर अग्निवीर हुआ है। अभिषेक की सफलता इसलिए भी काबिलेतारीफ है, क्योंकि उन्हांेने सीमित संसाधनों के दम पर यह सफलता हासिल की है। अभिषेक ने इसके लिए ना किसी कोचिंग का सहारा लिया और ना ही किसी तरह की कोई ग्राउंड ट्रेनिंग ली थी। उनके चयन की खबर मिलते ही डिब्बर पंचायत सहित पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि अभिषेक की सफलता ने क्षेत्र के युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा खड़ी कर दी है।

 

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साधारण परिवार, असाधारण हौसले

अभिषेक एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता राजू खेती.बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैंए जबकि माता आशा एक गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने हमेशा अभिषेक के सपनों को समर्थन दिया। अभिषेक ने वर्ष 2023 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कोटला बांगी से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की।

 

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बिना कोचिंग हासिल की सफलता

अभिषेक बताते हैं कि बचपन से ही उनके मन में वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना था। आर्थिक स्थिति सामान्य होने के कारण वे बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग नहीं ले सके। लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने यूट्यूब, किताबों और स्वयं अध्ययन को अपना हथियार बनाया और कड़ी मेहनत शुरू कर दी। पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उन्होंने अग्निवीर परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया।

 

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परिवार और प्रेरणा का अहम योगदान

अभिषेक अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता-पिता के साथ-साथ अपनी बुआ रूपना हितेषी को देते हैं, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और सही दिशा दिखाई। उनका कहना है कि परिवार का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। अपनी सफलता के बाद अभिषेक ने युवाओं से अपील की कि वे एक लक्ष्य तय करें और पूरी मेहनत व लगन से उसके लिए जुट जाएं। उनका कहना है कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता के रास्ते में रुकावट नहीं बन सकती, अगर इरादे मजबूत हों।

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