#हादसा
January 17, 2026
हिमाचल: घर से एक साथ उठी चार अर्थियां, मां -तीन मासूमों का एक चिता पर किया अंतिम संस्कार
एक साथ उठी चार अर्थियों ने झकझोर दिया पूरा सिरमौर जिला
शेयर करें:

नाहन। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के तलांगना गांव ने शुक्रवार को ऐसा मंजर देखा, जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। तलांगना गांव के एक घर से बीते रोज एक घर से जहां तीन मासूमों सहित चार अर्थियां उठीं तो उस मंजर को देख कर हर किसी की रूह कांप गई। हर कोई यही कहता सुना गया कि भगवान इस तरह की तबाही किसी के साथ ना करे।
दरअसल सिरमौर जिले के तलांगना गांव में 14 जनवरी की वह रात पूरे क्षेत्र के लिए कभी न भूल पाने वाला दर्द छोड़ गई। आग की लपटों ने एक ही परिवार की खुशियों को पलभर में राख कर दिया। जिस घर में त्योहार की खुशियां मनाई जानी थीं, वहां से एक साथ चार अर्थियां उठीं। बहू, मासूम पोता और दो पोतियों की चिताओं को एक साथ जलते देख पूरा गांव फूट.फूट कर रो पड़ा। यह मंजर इतना हृदयविदारक था कि मजबूत दिलों की आंखें भी छलक आईं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: पुलिस को देख बच्चों से भरी स्कूल बस को भगा ले गया चालक, रोते चिल्लाते रहे मासूम
चौपाल उपमंडल के बिज्जर गांव निवासी ठाकुर जोगेंद्र सिंह का परिवार माघी का त्योहार मनाने ससुराल आया था। घर में बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह खुशी कुछ ही घंटों में काल बनकर टूट पड़ेगी। लोकेंद्र सिंह अपनी पत्नी कविता, बेटे कृतिक और बेटियों कृतिका व सारिका के साथ तलांगना गांव पहुंचे थे। रात को सभी लोग सो रहे थे, तभी अचानक आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया।
आग इतनी भीषण थी कि दूसरे कमरे में सो रहे छह लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। लोकेंद्र सिंह ने जान बचाने के लिए लोहे के सरिये से खिड़की तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पत्नी कविता, बेटा कृतिक और दोनों बेटियां कृतिका व सारिका आग की लपटों में हमेशा के लिए खामोश हो गए। लोकेंद्र खुद बुरी तरह झुलस गया और जिंदगी भर का दर्द लेकर बच पाया।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: तेज रफ्तार ने छीन लिया एक और बेटा, अस्पताल पहुंचने से पहले ही युवक ने तोड़ा दम
अग्निकांड के बाद मलबे में दबे जले हुए अवशेषों को जेसीबी मशीन की मदद से बाहर निकाला गया। पहचान संभव न होने पर डीएनए जांच करवाई गई, जिसके बाद अवशेषों को परिजनों को सौंपा गया। जब बिज्जर गांव में अवशेष पहुंचे, तो पूरे गांव में मातम पसर गया। हर चेहरा गम में डूबा था और हर आंख नम।
शुक्रवार सुबह जब एक ही चिता पर चार लोगों जिसमें मां के साथ उसके चार बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया, तो वह दृश्य हर किसी का कलेजा चीर देने वाला था। लोकेंद्र के भाई यशवंत, भतीजे बनी और अक्षय ने कांपते हाथों से मुखाग्नि दी। चिता की आग के साथ मानो पूरे गांव का दिल भी जल रहा था। महिलाएं दहाड़ें मारकर रो रही थीं और पुरुषों की आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे थे।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : खेत में गए बेटे को इस हाल में मिली मां, थम चुकी थी सांसें; पति से थी परेशान
इस दर्दनाक हादसे ने सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे बिज्जर और आसपास के गांवों को झकझोर कर रख दिया है। एक घर से चार अर्थियां उठने का दृश्य हर किसी के जेहन में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। गांव में आज भी सन्नाटा है, और हर शख्स यही कह रहा है कि ऐसी त्रासदी किसी दुश्मन को भी न देखनी पड़े। यह अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक ऐसी त्रासदी है जिसने खुशियों से भरे एक पूरे परिवार को पलभर में खामोशी में बदल दिया और पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया।