#हादसा
September 16, 2026
हिमाचल की उफनती खड्ड में फंसे 6 श्रद्धालु : चेतावनी को किया अनदेखा, खतरे में डाली जा.न
चेतावनी के बावजूद खड्ड में नहाने उतरे श्रद्धालु
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मंगलवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई। जब बाणगंगा घाट के पास खड्ड में नहाने गए राजस्थान के छह श्रद्धालु अचानक बढ़े पानी के कारण बीच में फंस गए।
ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद खड्ड का जलस्तर अचानक बढ़ गया। देखते ही देखते पानी का बहाव तेज होने लगा, जिससे श्रद्धालुओं के लिए वापस लौटना मुश्किल हो गया।
पानी बढ़ता देख सभी श्रद्धालु घबरा गए और खड्ड के बीच एक खाली स्थान पर जाकर रुक गए। वहां से उन्होंने मदद के लिए आवाजें लगानी शुरू कर दीं। आसपास मौजूद लोगों को जब घटना का पता चला तो इसकी सूचना प्रशासन और अग्निशमन विभाग को दी गई।
श्रद्धालुओं के खड्ड के बीच फंसे होने की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम सक्रिय हो गई। कांगड़ा के तहसीलदार प्रकाश चंद ठाकुर भी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया।
बचाव कर्मियों ने परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी से श्रद्धालुओं को खड्ड के बीच से सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। पानी का बहाव बढ़ा हुआ होने के कारण रेस्क्यू टीम को भी सतर्कता बरतनी पड़ी।
करीब 45 मिनट तक चले प्रयास के बाद सभी छह श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बताया गया कि शाम करीब 6 बजे तक सभी श्रद्धालुओं को खड्ड से बाहर निकाल लिया गया था। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी श्रद्धालु को चोट नहीं आई।
फायर ऑफिसर अनिल कुमार ने बताया कि सभी छह श्रद्धालु राजस्थान के जयपुर से हिमाचल प्रदेश पहुंचे थे। वे प्रदेश के विभिन्न मंदिरों में दर्शन करने के लिए आए हुए हैं। मंगलवार को वे बाणगंगा घाट के पास पहुंचे और खड्ड में नहाने चले गए।
इसी दौरान ऊपरी क्षेत्रों में बारिश होने के कारण खड्ड का पानी अचानक बढ़ गया और वे बीच में फंस गए। अनिल कुमार के अनुसार, सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
फायर ऑफिसर ने लोगों को बरसात के मौसम में खड्डों और नदी-नालों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है। कई बार जिस स्थान पर लोग मौजूद होते हैं, वहां बारिश नहीं हो रही होती, लेकिन ऊपरी इलाकों में बारिश के कारण नीचे बहने वाली खड्डों में अचानक पानी बढ़ जाता है।
ऐसे में पानी का स्तर कुछ ही समय में तेजी से ऊपर आ सकता है और लोग बीच में फंस सकते हैं। इसलिए बरसात के दौरान खड्ड, नदी और नालों के किनारे विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
बाणगंगा घाट पर प्रशासन की ओर से लोगों को सावधान करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों के माध्यम से लोगों को बरसात के दौरान खड्ड में न जाने की हिदायत दी जाती है। इसके बावजूद कुछ श्रद्धालु और पर्यटक इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर खड्ड के बीच नहाने के लिए चले जाते हैं। मंगलवार की घटना के बाद एक बार फिर प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि चेतावनी को हल्के में न लें और बारिश के दौरान जलस्रोतों से दूरी बनाए रखें।
कांगड़ा के तहसीलदार प्रकाश चंद ठाकुर ने बताया कि बाणगंगा घाट पर चेतावनी बोर्ड पहले से लगाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग खड्ड में नहाने के लिए पहुंच जाते हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब यहां अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की जाएगी।
ये कर्मचारी मौके पर आने वाले लोगों को लगातार खड्ड में न जाने और अचानक बढ़ने वाले पानी के खतरे के बारे में जागरूक करेंगे। प्रशासन का उद्देश्य है कि भविष्य में इस तरह की स्थिति पैदा न हो और किसी व्यक्ति की जान जोखिम में न पड़े।
मंगलवार शाम हुई घटना में समय रहते प्रशासन और अग्निशमन विभाग को सूचना मिलना महत्वपूर्ण रहा। टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब पौने घंटे की मशक्कत के बाद सभी छह श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया। इस घटना ने एक बार फिर बरसात के दौरान पहाड़ी खड्डों में अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे को सामने ला दिया है।
विशेषज्ञों और प्रशासन की लगातार सलाह रहती है कि बरसात के मौसम में नदियों, खड्डों और नालों के आसपास जाने से बचें, क्योंकि ऊपरी क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर निचले क्षेत्रों में अचानक दिखाई दे सकता है। खासकर पर्यटकों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्थानीय चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी है।