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January 10, 2026

हिमाचल बस हा*दसा: कुपवी के 10 लोगों की मौ*त, बोहरा में एक साथ जली तीन चि*ताएं

दो साल के मासूम के सिर से उठा माता-पिता का साया

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bus accident sirmaur

नाहन। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के हरिपुरधार में शुक्रवार को हुए बस हादसे ने कई परिवारों को ऐसे जख्म दिए हैं, जो शायद जिंदगी भर नहीं भर पाएंगे। किसी घर से जवान बेटे छिन गए तो कई मासूम बच्चों के सिर से माता.पिता का साया उठ गया। अकेले कुपवी उपमंडल के 10 लोगों की इस दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। कुपवी के बोहरा गांव में जब एक साथ तीन चिताएं जलीं, तो उस मंजर को देखकर हर किसी की रूह कांप गई। माघी पर्व से पहले खुशियों की आस लगाए बैठे लोगों के लिए यह सफर कभी न लौटने वाला बन गया।

कुपवी पर टूटा दुखों का पहाड़

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के हरिपुरधार में हुए भीषण बस हादसे ने पूरे कुपवी उपमंडल को गहरे शोक में डुबो दिया है। इस हादसे में उपमंडल के 10 लोगों की जान चली गई, जबकि दर्जनों घायल अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। शिमला से वाया सोलन कुपवी जा रही निजी बस का यह सफर कई परिवारों के लिए अंतिम सफर साबित हुआ। माघी पर्व मनाने के लिए घर लौट रहे लोगों को क्या पता था कि रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है। जब हादसे के बाद मृतकों के शव गांव पहुंचे, तो हर गली, हर आंगन से रोने.बिलखने की आवाजें गूंज उठीं। पूरा क्षेत्र शोक और सन्नाटे में डूब गया।

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बोहरा गांव में एक साथ जलीं तीन चिताएं

कुपवी उपमंडल के बोहरा गांव में शनिवार को वह दृश्य सामने आया, जिसे कोई भी कभी भूल नहीं पाएगा। एक ही गांव में एक साथ तीन चिताएं जलीं। 35 वर्षीय रमेश, उनकी पत्नी साक्षी और गांव के अन्य दो मासूमों की मौत ने हर किसी का कलेजा छलनी कर दिया। दंपति की मौत के बाद उनका दो साल का बेटा पूरी तरह बेसहारा हो गया है। अंतिम संस्कार के दौरान मासूम की निगाहें बार-बार अपने मां-बाप को तलाशती रहीं, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। इसी गांव की रियांशी और कियान की मौत ने भी पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। चार लोगों की एक साथ मौत ने गांव की खुशियां छीन लीं।

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10 परिवारों से उजड़ गई खुशियां

इस हादसे में कुपवी उपमंडल के अलग.अलग गांवों के लोग काल का ग्रास बने। चंजाह गांव की 6 वर्षीय हिमांशी और 21 वर्षीय प्रोमिला की असमय मौत ने यह साबित कर दिया कि हादसे उम्र नहीं देखते। धौलत गांव की 50 वर्षीय हिमा और 60 वर्षीय सूरत सिंह की मौत से उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दोची गांव की 28 वर्षीय सुमन, जो शिमला के लोअर बाजार में कपड़े की दुकान में नौकरी करती थीं, माघी पर्व के लिए घर लौट रही थीं। उनके परिजन घर में इंतजार कर रहे थे, लेकिन पहुंची तो सिर्फ उनकी मौत की खबर।

घर का इकलौता सहारा भी छिन गया

जुडू-शिलाल गांव के निवासी बिलम सिंह की मौत ने उनके परिवार की कमर तोड़ दी है। बिलम सिंह शिमला में होटल लीज पर लेकर काम करते थे और घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। वह अपनी कॉलेज में पढ़ने वाली बेटी निकिता के साथ घर लौट रहे थे। निकिता भी इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई है और सोलन अस्पताल में उपचाराधीन है। अब घर में सिर्फ पत्नी और दो बेटियां रह गई हैं, जिनके सामने भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है।

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हादसे की भयावह तस्वीर

शुक्रवार दोपहर करीब 2:40 बजे हरिपुरधार के पास यह ओवरलोड निजी बस सड़क से फिसलकर करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में चालक समेत 14 लोगों की मौत हो गईए जबकि 50 से अधिक यात्री घायल हुए। बस में क्षमता से कहीं ज्यादा लोग सवार थे। बताया जा रहा है कि सड़क पर जमी पाला (बर्फ) के कारण बस स्किड हो गई।

घायलों का इलाज नाहन मेडिकल कॉलेज, राजगढ़, सोलन, आईजीएमसी शिमला और पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है। सरकार ने हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं।

माघी पर्व से पहले मातम

यह हादसा माघी पर्व से पहले कुपवी उपमंडल के लिए ऐसा जख्म दे गया है, जिसे भरने में बरसों लगेंगे। जिन घरों में त्योहार की तैयारियां चल रही थीं, वहां अब मातम पसरा है। यह बस हादसा न सिर्फ एक दुर्घटना है, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ देने वाली त्रासदी बन गया है।

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