#हादसा
July 6, 2025
हिमाचल: 3 मासूम बेटियों के सिर से उठा पिता का साया, खेत में गए शख्स के ऐसे निकले प्राण
छह साल की है मृतक की सबसे बड़ी बेटी परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
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नाहन। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के कोटी धीमन पंचायत के अंतर्गत भवाई गांव में एक तीन बेटियों के पिता की दर्दनाक मौत हो गई है। इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। खेत में काम कर रहे एक 35 वर्षीय व्यक्ति की पेड़ से गिरने के कारण मौत हो गई। मृतक की पहचान इंदर सिंह पुत्र स्वर्गीय तुलसी राम के रूप में हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इंदर सिंह अपने खेत में पशुओं के लिए पत्तियां तोड़ने के उद्देश्य से एक पेड़ पर चढ़े हुए थे। इसी दौरान अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह पेड़ से नीचे गिर गए। हादसे के तुरंत बाद परिजन उन्हें गंभीर अवस्था में ददाहू अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए नाहन मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
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इंदर सिंह की असमय मौत ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे गांव को गहरे शोक में डुबो दिया है। बताया जा रहा है कि वह अपने पीछे तीन छोटी बेटियों को छोड़ गए हैं। इनमें सबसे बड़ी बेटी की उम्र मात्र 6 वर्ष हैए जबकि दो अन्य बेटियां उससे भी छोटी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही काफी दयनीय थी और अब इस हादसे ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ कर रख दिया है।
गांववासियों और परिजनों का कहना है कि इंदर सिंह मेहनत.मजदूरी करके किसी तरह अपने परिवार का गुजारा कर रहे थे। अब उनके चले जाने के बाद बच्चों और पत्नी के सामने रोजी.रोटी का संकट गहरा गया है। इस परिस्थिति में ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को आपातकालीन आर्थिक सहायता और पुनर्वास सहायता शीघ्र उपलब्ध करवाई जाए।
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स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि प्रभावित परिवार को त्वरित मुआवजा दिया जाए और बच्चों की शिक्षा एवं पालन.पोषण के लिए विशेष योजना के अंतर्गत सहायता दी जाए। इस तरह के हादसों में प्रभावित परिवारों को स्थायी सहायता की आवश्यकता होती हैए ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
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हादसे के बाद पूरे भवाई गांव में शोक की लहर है। रविवार को जब इंदर सिंह का शव पोस्टमार्टम के बाद गांव लाया गया तो हर आंख नम थी। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और परिवार को ढांढस बंधाया। यह हादसा एक बार फिर से ग्रामीण क्षेत्रों में काम करते समय सुरक्षा सावधानियों की आवश्यकता को उजागर करता है। साथ ही यह भी प्रश्न उठाता है कि गरीब और सीमांत परिवारों के लिए आपदा के समय त्वरित सरकारी सहायता कितनी कारगर है।