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September 13, 2025

हिमाचल में खराब हो गया हजारों टन सेब, सड़क किनारे बोरियों में लगा सड़ने, टूटी सड़कों ने बढ़ाई दिक्कतें

सेब की बोरियां खुले आसमान के नीचे हो रही खराब

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हिमाचल में बारिश बनी अभिशाप

शिमला। हिमाचल प्रदेश इस साल भीषण बारिश और प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है। जहां इस आफत ने राज्यभर में करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, वहीं सेब उत्पादक किसानों की मेहनत पर भी पानी फेर दिया है। राज्य सरकार द्वारा संचालित हिमाचल बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (HPMC) द्वारा किसानों से खरीदा गया हजारों टन सेब आज सड़कों के किनारे सड़ता हुआ नजर आ रहा है।

 

सेब की इस दुर्दशा का मुख्य कारण ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था का ठप होना और HPMC द्वारा समय पर नीलामी प्रक्रिया न कर पाना है। कई जगहों पर सेब की बोरियां खुले आसमान के नीचे पड़ी हैं, जहां लगातार हो रही नमी और मौसम की मार के कारण सेब तेजी से खराब हो रहे हैं।

 

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सड़कों की दुर्दशा बनी बाधा

राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस संबंध में बताया कि भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में सड़कों का संपर्क टूट गया था, जिससे ट्रकों की आवाजाही प्रभावित हुई। कई स्थानों पर बड़े ट्रक अब तक नहीं पहुंच पाए हैं। हालांकि अब हालात सामान्य हो रहे हैं और सड़कें धीरे-धीरे बहाल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द फंसे हुए सेबों को निकालने का प्रयास कर रही है।

MIS योजना के तहत खरीदी गई 43 हजार मीट्रिक टन सेब

HPMC इस वर्ष मंडी मध्यस्थता योजना (Market Intervention Scheme - MIS) के तहत सेब बागवानों से निम्न गुणवत्ता का सेब खरीद रहा है। अब तक निगम द्वारा 43,000 मीट्रिक टन सेब खरीदे जा चुके हैं। इस खरीद प्रक्रिया के लिए 276 खरीद केंद्रों की अधिसूचना जारी की गई थी, परंतु अब तक केवल लगभग 240 केंद्र ही सक्रिय हो पाए हैं।

 

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12 रुपये प्रति किलो की दर पर खरीदी

सरकार ने इस वर्ष MIS योजना के तहत सेब खरीदने की दर 12 रुपये प्रति किलो तय की है। खराब मौसम के चलते इस बार बड़ी संख्या में बागवानों को उच्च गुणवत्ता का सेब नहीं मिल पाया, जिससे उन्हें मजबूर होकर अपने सेब सस्ते दामों पर HPMC को बेचने पड़े।

HPMC करेगा 25,000 मीट्रिक टन सेब का प्रोसेसिंग

HPMC की योजना है कि वह खरीदे गए सेब में से करीब 25,000 मीट्रिक टन सेब का खुद प्रसंस्करण करेगा। शेष सेब को नीलामी के माध्यम से बेचा जाना है, लेकिन ऑक्शन प्रक्रिया की सुस्ती और कुप्रबंधन के चलते यह सेब खुले में पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है।

 

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सरकार को भी हो रहा आर्थिक नुकसान

सूत्रों के अनुसार, जिन सेबों को सरकार ने 12 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा है, अब उन्हें बेहद कम कीमतों पर ऑक्शन में बेचा जा रहा है। इससे न केवल बागवानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा है, बल्कि सरकार को भी भारी राजस्व घाटा उठाना पड़ रहा है।

 

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बागवानों की कमर टूटी, मौसम और सिस्टम दोनों से हारे

सेब बागवानों की मानें तो इस साल उनके लिए मौसम के साथ-साथ सरकारी तंत्र की सुस्ती भी किसी आपदा से कम नहीं रही। पहले भारी बारिश ने उनके बागों को नुकसान पहुंचाया, फिर गुणवत्ता खराब होने से बाजार में उनकी फसल की मांग घटी और अब HPMC द्वारा खरीदे गए सेबों का समय पर न निपटारा हो पाने से उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

क्या कहता है सरकार का भविष्य का रोडमैप?

सरकार ने संकेत दिए हैं कि जैसे-जैसे सड़कों की मरम्मत और यातायात बहाल होता है, वैसे-वैसे सेब की ट्रांसपोर्टेशन और नीलामी प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। लेकिन बागवानों की पीड़ा अब तक किसी राहत की प्रतीक्षा में है।

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