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March 16, 2025

इस बार जीरो टैक्स बजट की 30 साल पुरानी परंपरा तोड़ सकती है सुक्खू सरकार 

शनिवार देर शाम तक चला बजट पर मंथन, आत्मनिर्भर हिमाचल 2026 पर फोकस 

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बजट 2025-2026

शिमला। हिमाचल प्रदेश में जब हम और आप शुक्रवार को होली के रंग में डूबे हुए थे, उस दिन राज्य के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रंग पर्व में औपचारिक रूप से भाग लेकर सीधे राज्य सचिवालय का रुख किया और देर रात पर बजट को लेकर मंथन करते रहे। शनिवार को भी देर शाम तक उनकी बैठकें चलती रहीं और कहीं तब जाकर बजट बन पाया। सोमवार

 

11 बजे सुक्खू अपना तीसरा बजट विधानसभा में पेश करेंगे।

 

केंद्र सरकार की कटौती के कारण संसाधनों की भारी तंगी झेल रही सुक्खू सरकार के लिए न तो इस बजट में कोई आसमानी लुकलुभावन वादा करना आसान है और न ही सभी को खुश करने के लिए जीरो टैक्स बजट की परंपरा का पालन करना। नए संसाधन जुटाने और राजस्व संकलन बढ़ाने के लिए उन्हें हो सकता है, कुछ अलोकप्रिय कदम भी उठाना पड़े। 

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क्या हैं सरकार की वित्तीय चुनौतियां

 
1. केंद्र सरकार इस साल हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान 3000 करोड़ रुपए की देगी। करीब इतनी की रकम सरकार को सैलरी और पेंशन के रूप में हर महीने खर्च करनी पड़ती है। वर्ष 2020-21 में हिमाचल को 10,249 करोड़ रुपये की राजस्व घाटा अनुदान सहायता प्राप्त हुई थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 6,258 करोड़ रुपये रह गई।


2. केंद्र सरकार ने हिमाचल के लिए बाहर से लोन लेने की सीमा भी 6600 करोड़ से घटा दी है। यानी सरकार कर्ज लेकर भी पैसे की तंगी दूर नहीं कर पाएगी। मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार अब तक 19 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। अब कर्ज पर निर्भरता सरकार को कम करनी होगी।

 

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क्या परंपरा इस बार टूटेगी 


हिमाचल प्रदेश के इतिहास में बीते 30 साल से आम लोगों को राहत देने के लिए जीरो टैक्स बजट पेश करने की परंपरा रही है। बताया जाता है कि संसाधनों की तंगी को देखकर सरकार इस बार कड़े फैसले लेने की हिम्मत दिखा सकती है। माना जा रहा है कि यह सेस और सब्सिडी में छूट के रूप में रहेगा, जिसका भार आखिरकार आम जनता की जेब पर ही पड़ेगा।

 

बीते वित्तीय वर्ष में प्रदेश को लगभग 19 हजार करोड़ रुपये का कर राजस्व प्राप्त हुआ था, जबकि शेष धनराशि विभिन्न केंद्रीय सहायता मदों से आई थी। इस बार सुक्खू सरकार को केंद्र समर्थित योजनाओं में भी ज्यादा मदद की उम्मीद नहीं है, खासकर तब, जबकि उनके साथ शर्तें जोड़ी गई हों।

 

आत्मनिर्भर हिमाचल 2026 पर फोकस 


सुक्खू सरकार के बजट 2025 में 2026 तक हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने पर प्रमुख रूप से फोकस होगा। इसके लिए एक ओर जहां सरकार अपनी 10 गारंटियों को जमीन पर शत-प्रतिशत लागू करने का प्रयास करेगी, वहीं नए संसाधन जुटाने के कदम भी उठाए जाएंगे। 

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यहां से आएगा पैसा


- इसमें सबसे पहले तो बिजली सब्सिडी को कम करने का ऐलान मुमकिन है, जिससे सरकार के पास 1000 करोड़ आएंगे। 
- विभिन्न प्रोजेक्ट्स में बिजली की रॉयल्टी का बढ़ाकर सुक्खू सरकार खजाने में 2200 करोड़ रुपए भर सकती है। 
- नई आबकारी नीति से राज्य को 3000 करोड़ रुपए के करीब आय होने का अनुमान है। 
- नई खनन नीति के जरिए भी सरकार को लगभग 700 करोड़ रुपए की आय होने की उम्मीद है। 
 
यहां भरेंगी नौकरियां 


सोमवार के बजट में सीएम सुक्खू राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों के माध्यम से नई नौकरियां भरने की तैयारी में दिख रही हैं। कुल 15000 से ज्यादा पद तो शिक्षकों और नर्सरी के बच्चों की देखभाल करने वाली आया के हैं। बजट में इन भर्तियों के लिए बजट का आवंटन किया जा सकता है। इसके अलावा सरकार का फोकस स्वास्थ्य सुविधाओं की मजबूती के लिए सुविधाओं के साथ ही विभिन्न अस्पतालों में डॉक्टर और स्पेशलिस्ट के खाली पड़े पदों पर भर्ती का भी है। बजट में इस तरह से कुल 20 से 25 हजार पदों पर भर्ती का ऐलान हो सकता है। 

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