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April 1, 2025
हिमाचल में शिक्षा के हाल: 129 स्कूलों में साइंस कॉमर्स बंद, कैसे आगे बढ़ पाएंगे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र
62 स्कूलों से विज्ञान और 67 स्कूलों से वाणिज्य संकाय हटाया
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शिमला। हिमाचल प्रदेश, जिसे शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता है, अब एक नई चुनौती का सामना कर रहा है। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन करते हुए एक बड़ा फैसला लिया था। सुक्खू सरकार ने हाल ही में 129 सरकारी स्कूलों से विज्ञान (Science) और वाणिज्य (Commerce) संकायों को बंद करने के आदेश जारी किए थे। इस फैसले के पीछे छात्रों की लगातार घटती संख्या और शिक्षकों की कमी को प्रमुख कारण बताया गया था। हालांकि, इस निर्णय का सबसे बड़ा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ा है जो विज्ञान और वाणिज्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देख रहे थे।
नीति आयोग की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा में अग्रणी राज्यों में शामिल है। लेकिन यू-डीआईएसई 2023-24 रिपोर्ट के आंकड़े कुछ और ही तस्वीर दिखाते हैं—
* 3,473 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत है।
* 65,819 छात्र इन एकल-शिक्षक स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं।
* 6 स्कूलों में कोई छात्र नामांकित नहीं, लेकिन वहाँ 10 शिक्षक तैनात हैं।
* माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 4.60% दर्ज की गई है।
25 फरवरी 2025 को शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर 62 स्कूलों से विज्ञान और 67 स्कूलों से वाणिज्य संकाय हटाने का फैसला किया। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत शर्मा के अनुसार, "कई स्कूलों में तीन-चार वर्षों से कोई छात्र इन विषयों में नामांकित नहीं था। यदि भविष्य में पर्याप्त छात्र आएंगे, तो सरकार दोबारा संकाय बहाल करेगी।"
2023 में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) ने PGT के 585 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति में देरी हुई। 2024-25 के बजट में शिक्षा के लिए ₹9,812 करोड़ आवंटित किए गए, इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान और वाणिज्य संकाय बंद किए जा रहे हैं। ASER 2024 रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण भारत में निजी स्कूलों की लोकप्रियता बढ़ रही है। लेकिन गरीब परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूलों में नहीं भेज सकते, जिससे उनकी शिक्षा सीमित हो रही है।
सरकार का कहना है कि यदि भविष्य में इन विषयों में रुचि रखने वाले छात्रों की संख्या बढ़ती है, तो संकायों को फिर से शुरू किया जाएगा। लेकिन इसका कोई ठोस खाका अभी तक नहीं दिया गया है। बहरहाल, अगर शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति और भी खराब हो सकती है।