#यूटिलिटी
August 14, 2025
हिमाचल के लाखों परिवारों को झटका- मनरेगा से हुए बाहर, जॉब कार्ड होंगे रद्द
अब सिर्फ कुछ लोगों का ही बनेगा जॉब कार्ड
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शिमला। ग्रामीण विकास को गति देने और गांव के लोगों को घरद्वार पर रोजगार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मनरेगा लागू किया था। इस योजना के तहत पात्र जॉब कार्ड धारकों को हर साल 100 दिन का अकुशल कार्य प्रदान करने की गारंटी है।
इसका लाभ न केवल सार्वजनिक कार्यों जैसे सड़क, नहर या तालाब निर्माण तक सीमित है, बल्कि पात्र परिवार अपने निजी विकास कार्य जैसे बंजर भूमि को खेती योग्य बनाना, वर्षा जल संचयन टैंक बनवाना, बागवानी के लिए पौधारोपण या कैटल शेड निर्माण जैसे कार्य भी करवा सकते हैं।
अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में सरकारी विभागों में कार्यरत नियमित, अनुबंध और पेंशन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को मनरेगा का लाभ नहीं मिलेगा
ग्रामीण विकास विभाग ने अगस्त 2025 में आदेश जारी कर पंचायतों को निर्देश दिया है कि जॉब कार्ड जारी करने से पहले आवेदक की पात्रता की पूरी जांच की जाए। केवल ऐसे परिवार जिन्हें वैकल्पिक आजीविका का स्रोत नहीं है, उन्हें ही योजना का लाभ मिलेगा।
दरअसल, यह शर्त पहले से ही मनरेगा की गाइडलाइन में मौजूद थी, लेकिन हिमाचल में वर्षों से इसका सही पालन नहीं हो रहा था। नतीजतन सरकारी कर्मचारी और पेंशनर परिवार भी न केवल निजी कार्य मनरेगा से करवा रहे थे, बल्कि खुद दिहाड़ी लगाकर 100 दिन का रोजगार भी ले रहे थे।
यहां तक कि पेंशनर भी इस योजना के तहत कार्यरत पाए गए। इस पर एक याचिका हाईकोर्ट में पहुंची, जिसके बाद विभाग से गाइडलाइन पर स्पष्टीकरण मांगा गया। अब विधि विभाग की राय के बाद औपचारिक आदेश जारी हो गए हैं।
विदित रहे कि, प्रदेश में 1,87,340 नियमित सरकारी कर्मचारी, 1,78,218 पेंशनर और हजारों अनुबंध कर्मचारी हैं। अनुमान है कि इससे करीब 4.5 लाख परिवार मनरेगा की पात्रता सूची से बाहर हो जाएंगे। वर्तमान में हिमाचल में 15.55 लाख जॉब कार्ड धारक हैं, जिनमें 9.31 लाख एक्टिव हैं। इस फैसले के बाद जॉब कार्ड धारकों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।
मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 266 प्रकार के कार्य किए जा सकते हैं-जिनमें तालाब, चेक डैम, नहर, सड़क, पौधारोपण, गौशाला, भंडारण गोदाम और बाढ़ नियंत्रण जैसी गतिविधियां शामिल हैं।