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August 29, 2025
हिमाचल में अभी नहीं मिलेगी राहत, अगले दो दिन भारी बारिश की चेतावनी; सावधान रहें लोग
भारी बारिश से लैंडस्लाइड, भूस्खलन से भारी नुकसान
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून अपने अंतिम चरण में पहुंचते हुए भी रुकने का नाम नहीं ले रहा। अगस्त माह का अंत राज्य के लोगों के लिए राहत की बजाय और भी बड़ी मुश्किलें लेकर आया है। पहाड़ी राज्य में बीते कुछ दिनों से लगातार भारी बारिश] भूस्खलन और जलभराव जैसी आपदाएं सामने आ रही हैं, जिनसे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है।
मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के लिए 29 से 31 अगस्त तक लगातार येलो अलर्ट जारी किया है। ऊना, कांगड़ा, मंडी, सिरमौर, शिमला, कुल्लू, चंबा जैसे प्रमुख जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है। साथ ही मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। सोलन, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे इलाकों में बारिश की तीव्रता कम होने के आसार हैं, लेकिन सतर्कता जरूरी है।
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राज्य के कई हिस्सों में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। किन्नौर जिले में बादल फटने से भोगती नाले में अचानक आई बाढ़ ने दो मकान जमींदोज कर दिए। दो लोग मलबे में दब गए, हालांकि स्थानीय लोगों ने तत्परता से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वहीं, कुल्लू जिले के आनी उपमंडल में लैंडस्लाइड की वजह से दो घर क्षतिग्रस्त हो गए, जिसमें एक महिला की मौत हो गई और दूसरी की तलाश अब भी जारी है।
राज्य में भारी बारिश के कारण सड़कों के टूटने और पुलों के बह जाने से लोगों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा है। कुल्लू जिले के खादवी गांव में तीन घर भूस्खलन की चपेट में आ गए। इतना ही नहीं, सड़कों के जर्जर होने के कारण एक मरीज को कुर्सी पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे आपदा के दौरान सरकारी व्यवस्थाओं की असलियत सामने आ गई।
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मणिमहेश यात्रा इस बार श्रद्धा के साथ-साथ संवेदनाओं और शोक की यात्रा बनती जा रही है। 16 अगस्त से शुरू हुई इस यात्रा में अब तक 22 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें से अधिकतर की जान पत्थर गिरने और ऑक्सीजन की कमी के चलते गई है। 25 से 28 अगस्त के बीच 11 श्रद्धालुओं की मौत हुई, जिनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश और चंबा के लोग शामिल हैं। पंजाब के फरीदकोट जिले से 15 युवक लापता बताए जा रहे हैं, जिनके परिजन सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
प्रदेश में भारी बारिश से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह के अनुसार, केवल 24 से 26 अगस्त के बीच हुई बारिश में 158 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। इस मानसून सीजन में अब तक विभाग को 1444 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। 5667 किलोमीटर सड़कें, 34 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग और 70 पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई इलाकों में संपर्क मार्ग पूरी तरह टूट गए हैं।
राज्य में आई आपदा को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्य सचिव और प्रभावित जिलों के उपायुक्तों के साथ बैठक कर राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। सीएम ने खास तौर पर मणिमहेश यात्रा पर आए श्रद्धालुओं, पर्यटकों, महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। भरमौर और चंबा में फंसे लोगों के लिए रहने और भोजन की व्यवस्था के आदेश भी दिए गए हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, अगले 48 घंटों में अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की धीरे-धीरे गिरावट देखने को मिल सकती है। न्यूनतम तापमान में भी फिलहाल कोई बड़ी तब्दीली नहीं आएगी। यानी बारिश का यह दौर फिलहाल थमने की संभावना नहीं है।
राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने आम लोगों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे खतरनाक या संवेदनशील क्षेत्रों में जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करें। भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए सावधानी ही सबसे बड़ा उपाय है।